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मध्यप्रदेश

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, बोला- सभी इंटरफेथ मैरिज मामलों में सुरक्षा नहीं दी जा सकती

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है।

इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है।

याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।

धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट
वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन।

अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते।

तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।

 

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