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उत्तर प्रदेश

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

जेलों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री

केवल पेशेवर अपराधी, माफिया को जेलों में रखने की जरूरत, छोटे अपराधों में ओपन जेल की परिकल्पना उपयोगी

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए: मुख्यमंत्री

प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 हुई

सात नए कारागार शुरू, छह निर्माणाधीन; बंदी क्षमता में लगातार बढ़ोतरी

6200 सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मजबूत हुई जेल सुरक्षा व्यवस्था

‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ से बंदियों को मिल रहा कौशल और रोजगार का अवसर

लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से कारागारों को नई पहचान दी जाए।

बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को गति दी गई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई। जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने के अभाव में जेल में बंद कैदियों की सूची तैयार की जाए।

मुख्यमंत्री ने 'ओपन जेल' की परिकल्पना को विशेष महत्व देते हुए इसे साकार रूप में लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए 'ओपन जेल' उपयोगी होगी। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने नए कारागारों और बैरकों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है। 

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। इसके अतिरिक्त अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला करागारों के निर्माण को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 30 ड्रोन कैमरे, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 195 बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी कैमरे तथा मेनवॉल पर वायर फेंसिंग कराई गई है। न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि लखनऊ, आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर, उन्नाव और अन्य कारागारों में सिलाई, दरी, कम्बल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी, कार्पेट और विभिन्न हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक वातावरण के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं।

बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।  

बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं तथा विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

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