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देश

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, भारत सतर्क; मेडिकल सहायता भी भेजी गई

नई दिल्ली

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था। 

संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि
आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला ('बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता
इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने 'अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं। 

भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। 

देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट
भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 

कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें। 

इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन बेहद खतरनाक
इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

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