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देश

पुलवामा आतंकी हमजा बुरहान से परिवार भी था परेशान, पिता ने सुनाई दर्दभरी कहानी

श्रीनगर

पुलवामा आतंकी हमले का बदला पूरा हो गया. 6 साल की देरी ही सही, मगर उसका मास्टरमाइंड मारा गया. पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान का धुरंधर स्टाइल में मर्डर हो गया. आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी. यह घटना मुजफ्फराबाद में हुई, जहां उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं. गोलियों से छलनी आतंकी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. आतंकी हमजा बुरहान की मौत पर उसके पिता की प्रतिक्रिया आई है. अल-बदर आतंकी हमजा बुरहान के पिता ने कहा कि उसने आतंक का रास्ता चुना था. इसलिए उसकी मौत ठीक हुई। 

जी हां, अल-बदर आतंकी संगठन से जुड़े हमजा बुरहान की मौत के बाद उसके पिता ने बड़ा बयान दिया है. आतंकी के पिता ने कहा कि परिवार ने उसकी वजह से काफी परेशानियां झेली हैं. पिता के मुताबिक, ‘हमजा पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान गया था और MBBS करने की बात कही थी, लेकिन वहां जाकर उसने आतंकवाद का रास्ता चुन लिया.’ उन्होंने कहा, ‘हमने उसकी वजह से बहुत दुख झेला, अच्छा हुआ वह मारा गया। 

आतंकी हमजा कौन था, कहां था?
दरअसल, हमजा बुरहान का नाम जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों और हमलों से जोड़ा जाता रहा है. सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी थीं. 2022 में भारत सरकार ने उसे आतंकवादी घोषित किया था और कहा था, ‘अरजुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर खारबतपोरा, रत्नीपोरा, पुलवामा का निवासी था. वह अल-बद्र आतंकी संगठन का सहयोगी सदस्य था, जिसे यूएपीए के तहत प्रतिबंधित किया गया.’ उसकी उम्र महज 23-24 साल थी। 

पुलवामा में ही पैदा हुआ था आतंकी हमजा
आतंकी हमजा को डॉक्टर भी कहा जाता था. वह पुलवामा के रत्नीपोरा क्षेत्र में पैदा हुआ था. वह 2017 में यह कहकर पाकिस्तान गया था कि वह उच्च शिक्षा यानी एमबीबीएस के लिए जा रहा है, लेकिन बाद में वह आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया और जल्दी ही कमांडर बन गया. अल-बद्र में शामिल होने के बाद वह कश्मीर लौटा. उस पर दक्षिण कश्मीर में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने और उन्हें आतंकी संगठनों में शामिल करने का आरोप था. उसका नेटवर्क मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था। 

कश्मीर में कैसे खड़ा किया था आतंकी नेटवर्क
कश्मीर में रहने के दौरान उसने पुलवामा से शोपियां तक अपना नेटवर्क फैलाया. उसकी मौत को पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वह उन प्रमुख लोगों में से था जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों के लिए काम करते थे. पुलवामा आतंकी हमला भारत के सबसे घातक हमलों में से एक था. 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीआरपीएफ जवानों के काफिले पर हमला किया गया था. लेथपोरा क्षेत्र में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन के साथ बस को टक्कर मार दी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। 

पुलवामा अटैक का बदला
यह हमला जैश-ए-मोहम्मद ने किया था और हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी. इस हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान में कई आतंकवादियों को अज्ञात बंदूकधारियों ने निशाना बनाया है. हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और जांचों को लेकर भी खामोशी बरकरार रखी है। 

लश्कर-जैश में खलबली
बीते दो वर्षों में धुरंधर स्टाइल मर्डर से पाकिस्तान में हड़कंप है. कुछ सालों से ऐसी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी होती देखी गई है. पाकिस्तान के शीर्ष आतंकियों और नेताओं को अज्ञाक द्वारा निशाना बनाए जाने से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को दोबारा संगठित होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इन दोनों आतंकी गुटों को काफी नुकसान झेलना पड़ा है. अपनी कारनामों को ये लोग अंजाम नहीं दे पा रहे हैं. ऐसी हत्याओं ने इनके मनोबल को काफी तोड़ा है और इससे जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। 

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