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मध्यप्रदेश

हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई टेंशन, शुगर और समयपूर्व प्रसव के केस भी बढ़े

भोपाल
भोपाल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक हाल ये है कि पहले जहां कुल गर्भवतियों में 20 से 25 प्रतिशत मामले हाई रिस्क श्रेणी में आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और समय पर जांच नहीं होने से मां और नवजात दोनों की जान पर खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम उम्र में गर्भधारण से मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। एनीमिया इसकी सबसे बड़ी वजह है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों में तेजी आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हर महीने करीब 3 हजार प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 900 से 1200 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई जा रही हैं। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई बीपी, शुगर, समय से पहले प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामले प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही

भोपाल के अस्पतालों में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से गंभीर गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सेवन और हाई बीपी-शुगर की मॉनिटरिंग हो तो इसकी आशंका कम हो जाती है।

प्रदेश में एनीमिया सबसे बड़ी वजह
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 54 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यही स्थिति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा कारण बन रही है।

बता दें कि राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आने वाली लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन सामान्य से कम पाया जा रहा है। कई मामलों में यह स्तर 7 ग्राम से नीचे पहुंच जाता है।

प्रमुख बिंदु
भोपाल में बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस
हर तीसरी गर्भवती जटिल श्रेणी में
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
शुगर के कारण बढ़ी मुश्किलें
समय से पहले प्रसव भी अहम वजह
कम उम्र में गर्भधारण मुख्य कारण
एनीमिया सबसे बड़ी वजह

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