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छत्तीसगड़

संघर्ष से सफलता तक : बीजापुर की महिलाओं को मिले सपनों के नए पंख

नक्सल मुक्त बीजापुर में विकास की नई सुबह, पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण से मिल रहा रोजगार का अवसर

रायपुर,

कभी नक्सल हिंसा की छाया से प्रभावित रहा बीजापुर अब विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। माओवाद के अंत के बाद जिला तेजी से मुख्यधारा की ओर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के साहस, शासन की प्रभावी पुनर्वास नीति और प्रशासन की सतत पहल ने बीजापुर को शांति एवं विकास के नए दौर में प्रवेश कराया है।
राज्य शासन की पुनर्वास नीति केवल आत्मसमर्पण या पुनर्वास तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुनर्वासित परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बीजापुर जिले की पुनर्वासित महिलाओं को मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत स्थानीय गारमेंट फैक्ट्री में सिलाई प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से बदल रही जिंदगी

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्हें आधुनिक सिलाई तकनीक, मशीन संचालन और परिधान निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाओं को उसी गारमेंट फैक्ट्री में रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल से महिलाओं को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात उन्हें प्रतिमाह लगभग 5 से 8 हजार रुपये तक का पारिश्रमिक दिया जाएगा।  जिससे वे आर्थिक रूप से निरंतर सशक्त बनी रहें।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

पुनर्वासित महिलाओं के चेहरे पर अब भविष्य को लेकर नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं कभी हिंसा और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रही थीं, वे आज रोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए महिलाओं को सम्मानजनक जीवन देने का सशक्त माध्यम बन रही है।

बीजापुर बन रहा विकास और विश्वास का प्रतीक

बीजापुर में चल रही पुनर्वास एवं कौशल विकास की यह पहल शासन की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नीति का उदाहरण है। जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वासित परिवारों को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
नक्सलवाद से मुक्त होकर अब बीजापुर विकास, शांति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रहा है। पुनर्वासित महिलाओं की सफलता यह संदेश दे रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।

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