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उत्तर प्रदेश

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ

भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है।

आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है।

गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल
उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता
योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है

गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया।

समृद्धि व धर्म का आधार
उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

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