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देश

भारत की बढ़ी परमाणु ताकत: MIRV क्षमता वाली अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली
भारत ने अपनी रक्षा क्षमता में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री-एंट्री व्हीकल) प्रणाली से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। परीक्षण 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से किया गया। इस मिसाइल ने सभी निर्धारित मापदंडों को पूरा किया और हिंद महासागर क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक दायरे में अलग-अलग लक्ष्यों को सटीक रूप से निशाना बनाने की अपनी क्षमता साबित की।

एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस उन्नत अग्नि मिसाइल का परीक्षण स्ट्रैटजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के सहयोग से किया गया। मिसाइल कई पेलोड्स (वारहेड्स) से लैस थी, जिन्हें स्वतंत्र रूप से विभिन्न दिशाओं और दूरी पर स्थित लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया। एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की यह क्षमता भारत को विश्व के चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की पंक्ति में खड़ा करती है।

राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और सेना को दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय सेना और संबंधित उद्योग जगत को बधाई देते हुए कहा कि इस सफल परीक्षण से बढ़ते खतरों के प्रति देश की रक्षा तैयारियों में अभूतपूर्व क्षमता जुड़ गई है। यह ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ को और मजबूत बनाएगा। उन्होंने वैज्ञानिकों की मेहनत की सराहना की और कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करती है।

MIRV तकनीक का महत्व
MIRV प्रणाली एक मिसाइल को एक साथ कई स्वतंत्र वारहेड्स ले जाने और उन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर मार्गदर्शन करने की क्षमता देती है। इससे दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हो जाता है। अग्नि सीरीज की यह उन्नत संस्करण 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकती है, जो चीन के अधिकांश हिस्सों और पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र को कवर करती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसे अग्नि-5 Mk2 या उन्नत वेरिएंट बताया जा रहा है, जिसमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) जैसी अतिरिक्त क्षमताएं भी शामिल हो सकती हैं।

चीन-पाक की उड़ी नींद!
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत की रणनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। चीन की आक्रामक नीतियां और पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की कोशिशें देखते हुए यह सफलता सामरिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि MIRV-सक्षम अग्नि मिसाइल से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड और मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय स्थिरता में नया संदेश जाएगा। DRDO के वैज्ञानिकों ने टेलीमेट्री, रडार और शिप-बेस्ड स्टेशनों से प्राप्त डेटा के आधार पर पुष्टि की कि मिशन के सभी उद्देश्य पूरे हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि पर DRDO की तारीफ की।

यह सफल परीक्षण ‘मिशन दिव्यास्त्र’ (2024) के बाद MIRV तकनीक को और परिपक्व बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भारतीय सेना की मारक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और देश की सुरक्षा ढाल और मजबूत बनेगी।

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