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एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा, 99.8% साइबर केस लंबित, जांच प्रक्रिया धीमी

 पटना

बिहार में साइबर अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 2023 में 4450 के मुकाबले 2024 में साइबर अपराध के लगभग डेढ़ गुना अधिक 6380 कांड दर्ज किए गये। खास बात रही कि इस साल सूबे में साइबर अपराध के कुल 11764 लंबित कांडों में मात्र 12 कांडों का ही अंतिम रूप से निबटारा हो सका। 99.8 फीसदी कांड लंबित रह गये। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के जारी आपराधिक आंकड़े 2024 से इसकी जानकारी मिली है। आंकड़े के मुताबिक इस साल राष्ट्रीय स्तर पर भी करीब 91 फीसदी कांड लंबित रहे।

1333 साइबर अपराधी हुए गिरफ्तार, आठ दोषी करार
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल साइबर अपराध के मामले में बिहार से 1333 अपराधी गिरफ्तार हुए। बिहार में साइबर अपराध के जिन 12 मामलों में अंतिम कार्रवाई हुई, इनमें भी आठ दोषी करार दिए गये। इस साल देशभर में मात्र 2292 साइबर अपराधियों को सजा मिली। इनमें सर्वाधिक 637 तेलंगाना, 303 आंध्र प्रदेश और 237 कर्नाटक के रहे। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में साइबर अपराध से जुड़े 98 हजार मामले ट्रायल के लिए लंबित रहे। इनमें बिहार के 5782 मामले भी शामिल रहे। 2024 में दर्ज कांडों में से 917 कांड ट्रायल के लिए भेजे गये जबकि 2023 के 4865 कांड ट्रायल के लिए पूर्व से लंबित थे।

87% कांडों का नहीं हुआ अनुसंधान भी पूरा
आंकड़ों के मुताबिक साइबर अपराध के दर्ज कुल कांडों में 87 फीसदी कांडों का पुलिस अनुसंधान भी पूरा नहीं हो सका। अनुसंधान के लिए 11764 कांड उपलब्ध थे। इनमें 524 कांड पर्याप्त सबूत नहीं रहने के कारण बंद कर दिए गये। 917 मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।इस तरह, कुल 1481 मामले पुलिस के स्तर पर निष्पादित हुए। लेकिन, 10283 कांडों में पुलिस का अनुसंधान भी पूरा नहीं हो सका।

महिलाओं के विरुद्ध 864 साइबर अपराध हुए
बिहार में साइबर अपराध के दर्ज मामलों में 3771 ऑनलाइन ठगी, 1167 आपसी दुश्मनी, 187 फिरौती और 96 यौन शोषण से संबंधित रहे। महिलाओं के विरुद्ध 864 साइबर अपराध हुए। इनमें 40 साइबर ब्लैकमेलिंग, 73 साइबर छेड़खानी और 70 फेक प्रोफाइल से संबंधित रहे। इस दौरान बच्चों के विरुद्ध भी 21 साइबर अपराध दर्ज हुए।

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