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छत्तीसगड़

​सुशासन तिहार: घुटनों के बल चलने की मजबूरी थमी, ट्राइसाइकिल से मिली जीवन लाल के सपनों को नई रफ़्तार

​सुशासन तिहार: घुटनों के बल चलने की मजबूरी थमी,  ट्राइसाइकिल से मिली जीवन लाल के सपनों को नई रफ़्तार

​धमतरी के दिव्यांग जीवन लाल के लिए 'उम्मीद की किरण' बना जनसमस्या निवारण शिविर; अब आत्मनिर्भरता के साथ तय करेंगे अपनी राह

​रायपुर

      छत्तीसगढ़ सरकार की 'सुशासन' की संकल्पना अब धरातल पर उन चेहरों पर मुस्कान बनकर लौट रही है, जो वर्षों से अभावों में जी रहे थे। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम सिवनीकला में आयोजित 'सुशासन तिहार' एक ऐसा ही मंच बना, जिसने दिव्यांग जीवन लाल साहू के संघर्षपूर्ण जीवन को नई गति और गरिमा प्रदान की है।

​     ​सिवनीकला निवासी जीवन लाल साहू बचपन से ही दोनों पैरों की गंभीर दिव्यांगता का दंश झेल रहे हैं। दशकों तक उन्होंने वह दर्द सहा है, जहाँ चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए उन्हें घुटनों के बल रेंगना पड़ता था। शारीरिक अक्षमता के बावजूद जीवन लाल ने कभी खुद को बेबस नहीं माना। वे न केवल अपने परिवार की दो एकड़ कृषि भूमि की देखरेख में हाथ बंटाते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।

​शासन की योजनाओं का मिला संबल
      जीवन लाल के परिवार को शासन की विभिन्न जनहितैषी योजनाओं का निरंतर लाभ मिल रहा है। दिव्यांग पेंशन के रूप में 500 रुपए की ​आर्थिक सहायता और राशन कार्ड के जरिए हर महीने मिलने वाला 35 किलो चावल मिल रहा है। सुशासन तिहार के माध्यम से मौके पर ही ट्राइसाइकिल की उपलब्धता से अब कही आने जाने में समस्या नही होगी। ​

     जब जीवन लाल को ग्रामीणों से 'सुशासन तिहार' के बारे में पता चला, तो वे अपनी अर्जी लेकर समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता का आलम यह था कि उनके आवेदन पर बिना किसी विलंब के तत्काल कार्यवाही की गई और शिविर स्थल पर ही उन्हें निशुल्क ट्राइसाइकिल भेंट की गई। इस पर जीवन लाल ने कहा कि अब मुझे खेत जाने या गांव में कहीं भी आने-जाने के लिए दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मेरे लिए नए पैर हैं जो मुझे आत्मनिर्भर बनाएंगे।

​संवेदनशील प्रशासन, सशक्त नागरिक
    ​ट्राइसाइकिल पाकर भावुक हुए जीवन लाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि सरकार की इस संवेदनशीलता ने उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ दिया है।

     ​धमतरी के इस सुशासन तिहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासन द्वार तक पहुँचता है, तो अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का जीवन वाकई बदल जाता है। जीवन लाल की यह कहानी प्रदेश के हजारों दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा और सुशासन के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।

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