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छत्तीसगड़

डबरीपानी में कार्रवाई शुरू: बुलडोजर से महामाया पहाड़ के अतिक्रमण हटाए जाएंगे, पुलिस बल मौजूद

 अंबिकापुर
 अंबिकापुर के महामाया मंदिर (Mahamaya Temple) और महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी के संरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह चार एक्सीवेटर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा जाने लगा। पहले दिन 20 से अधिक मकानों को हटाने की तैयारी की गई है।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति को रोका जा सके।

कई वर्षों से जारी था कब्जे का खेल
वन विभाग के अनुसार, अंबिकापुर शहर से लगे डबरीपानी, श्रीगढ़, खैरबार, नवागढ़ और बधियाचुआ क्षेत्र में लंबे समय से वनभूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे थे। ये क्षेत्र धीरे-धीरे नए आवासीय इलाकों के रूप में विकसित हो गए, जहां सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं।

पिछले वर्ष वन विभाग ने श्रीगढ़ और चोरकाकछार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया। विभाग ने कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया था, लेकिन किसी ने वैध दस्तावेज पेश नहीं किए।

रात को चस्पा किया नोटिस, सुबह पहुंचा बुलडोजर
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई डबरीपानी से शुरू की गई है। यहां के 54 लोगों को अंतिम बेदखली का नोटिस जारी किया गया था। कुछ अतिक्रमणकारियों ने अंतिम बेदखली का नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है।

गुरुवार रात वन विभाग के कर्मचारी डबरीपानी पहुंचे और घरों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया। शुक्रवार सुबह फारेस्ट एसडीओ श्वेता कम्बोज के नेतृत्व में वन विभाग और पुलिस जवानों का अमला बुलडोजर लेकर डबरीपानी पहुंचा और कार्रवाई शुरू की गई।

पार्षद बोले- वन विभाग ने कार्रवाई में की देरी
पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि मार्च 2026 में ही रिजर्व फारेस्ट से 157 लोगों को अवैध कब्जा हटाने के लिए अंतिम बेदखली नोटिस की अवधि समाप्त हो गई थी। पुलिस बल दिए जाने के बाद भी डीएफओ अभिषेक जोगावत ने कार्रवाई नहीं की, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई थी।

आलोक दुबे ने कहा कि यहां दूसरे राज्यों से आए समुदाय विशेष के लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है।

सभी चिन्हित अतिक्रमण हटाए जाएंगे- एसडीओ
एसडीओ फारेस्ट श्वेता कम्बोज ने कहा कि 157 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी हुआ है। इनमें महामाया पहाड़, नवागढ़, डबरीपानी के अतिक्रमणकारी शामिल हैं। डबरीपानी में 54 अतिक्रमणकारियों में जिन लोगों को हाईकोर्ट से स्टे मिला है, उनका अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। शेष लोगों को चिन्हित कर उनका कब्जा तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।

श्वेता कम्बोज ने कहा कि सभी चिन्हित अतिक्रमणकारियों को अवैध कब्जा हटाया जाएगा। आज से यह कार्रवाई शुरू हो गई है।

27 मार्च को जारी हुआ था अंतिम नोटिस
वन विभाग ने 27 मार्च 2026 को अतिक्रमणकारियों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर वनभूमि खाली करने को कहा था। इसके बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की।

कार्रवाई में देरी होने के कारण कई कब्जाधारी हाईकोर्ट पहुंच गए और उन्हें स्थगन आदेश मिल गया। भाजपा पार्षद आलोक दूबे ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने वनभूमि से नियमानुसार कब्जा हटाने के निर्देश दिए।

रातभर रही हलचल, लोग हटाने लगे सामान
गुरुवार देर शाम वन विभाग की टीम डबरीपानी पहुंची और शुक्रवार से कार्रवाई शुरू करने की मुनादी कराई गई। क्षेत्र में नोटिस भी चस्पा किए गए। इसके बाद से इलाके में हलचल बढ़ गई। कई अतिक्रमणकारियों ने रात में ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था।

शुक्रवार सुबह वन और राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू करने से पहले लोगों को एक बार फिर सामान हटाने का समय दिया गया, जिसके बाद तोड़फोड़ शुरू हुई।

54 अतिक्रमणकारी डबरीपानी में चिन्हित
भारतीय वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी और अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट श्वेता काम्बोज ने बताया कि केवल डबरीपानी क्षेत्र में 54 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया है। इनमें से कुछ लोगों को न्यायालय से स्थगन आदेश मिला है, जबकि कुछ के आवेदन FRA के तहत लंबित हैं। ऐसे मामलों को छोड़कर बाकी कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

157 अतिक्रमणकारी चिन्हित
वन विभाग के अनुसार, महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी, नवागढ़ और घुटरापारा के संरक्षित वन क्षेत्रों में कुल 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए हैं। इन सभी को 27 मार्च 2026 को अंतिम नोटिस जारी किया गया था और 29 मार्च 2026 तक अतिक्रमण हटाने की समयसीमा तय की गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान सरगुजा कलेक्टर अवकाश पर थे, जिसके कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी हुई। बाद में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए लोगों ने वनभूमि पर कब्जा किया है। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

राजनीतिक मुद्दा बना वनभूमि अतिक्रमण
महामाया पहाड़ से लगे वन क्षेत्रों में अवैध कब्जे का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के तहत अतिक्रमण को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। वहीं कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाती रही है।

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