<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

72 घंटे में भारत की जीत, अमेरिकी विशेषज्ञ ने साझा किया रणनीति का विश्लेषण

 नई दिल्ली
अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कहा है कि भारत ने इस संघर्ष में रणनीतिक रूप से बड़ी जीत हासिल की. उन्होंने बताया कि 10 मई की सुबह तक भारत ने हवाई क्षेत्र में पूरी श्रेष्ठता बना ली थी, जबकि पाकिस्तान अपने हवाई ऑपरेशनों को जारी रखने में कमजोर हो चुका था। 

यह नतीजा किसी एक हमले या छोटी लड़ाई का परिणाम नहीं था, बल्कि कई दिनों तक चली सावधानीपूर्वक योजना और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने की मुहिम का नतीजा था. मई 2025 में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए। 

जब पाकिस्तान ने भारत के शहरों और सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया, तब भारत ने भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मजबूत जवाब दिया. यह चार दिन का संघर्ष 10 मई को पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम के साथ खत्म हुआ. इस दौरान भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम और कई अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया। 

भारत की रणनीति कैसे काम की
अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर जॉन स्पेंसर अब मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज के चेयर और अर्बन वारफेयर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर विस्तार से बताया कि भारत ने कैसे पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कमजोर किया. उन्होंने कहा कि 8 मई को भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा ठिकानों पर हमले किए, जिनमें चूनियां और पासरूर में अर्ली वार्निंग रडार और कम से कम एक HQ-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी शामिल थी. 9 मई को भी और हमले किए गए। 

ये हमले ज्यादातर लॉइटरिंग मुनिशन से किए गए. इनका मकसद था कि पाकिस्तान के रडार और मिसाइल सिस्टम को लगातार दबाव में रखा जाए, चाहे वे पहले हमलों से बचे हों या नई जगह पर तैनात किए गए हों. स्पेंसर ने लिखा कि इन हमलों से पाकिस्तान की देखने, कॉर्डिनेशन करने और जवाब देने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई. हवाई युद्ध में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे पहले कि लड़ाकू विमान आमने-सामने आएं, दुश्मन की रक्षा प्रणाली ही ध्वस्त हो जाती है। 

S-400 ने बदला खेल, पाकिस्तानी विमानों पर हालत खराब हो गई
स्पेंसर ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई. भारत की S-400 मिसाइल सिस्टम ने एक हाई वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को करीब 300 किलोमीटर दूर से निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान एयर फोर्स को यह सोचना पड़ा कि वे कहां और कैसे अपने विमानों को उड़ा सकते हैं. इस वजह से पाकिस्तानी विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र सीमित हो गया. उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ी। 

स्पेंसर ने माना कि शुरू के कुछ घंटों में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय विमानों को गिराने में सफलता हासिल की. यह शुरुआती सफलता पाकिस्तान के लिए प्रचार का अच्छा मौका बनी, लेकिन स्पेंसर कहते हैं कि छोटी-मोटी सफलता पूरे अभियान की जीत नहीं तय करती। 

पाकिस्तान ने बाद में सैकड़ों ड्रोन, CM-400एकेजी मिसाइलें, फतेह और हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत की एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें रोक लिया. भारत ने अपनी स्वदेशी आईएसीसीसीएस (Integrated Air Command, Control and Communication System) और आकाशतीर प्रणाली का इस्तेमाल किया, जिसने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम कर दिया। 

आधुनिक युद्ध: सिर्फ विमान नहीं, पूरा सिस्टम लड़ता है
जॉन स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान एक-दूसरे से नहीं लड़ते. इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कमांड नेटवर्क और एकीकृत सिस्टम बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत के पास बड़े पैमाने, गहराई और बेहतर एकीकरण था. इसी वजह से भारत शुरुआती झटके को सहन कर सका और फिर अपना ऑपरेशनल टेम्पो पाकिस्तान पर थोप दिया। 

दूसरी ओर पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से मिले हथियारों पर निर्भर था. शुरुआत में इनसे कुछ सफलता मिली, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान की महत्वपूर्ण नोड्स को नष्ट कर दिया तो पाकिस्तान लड़ने लायक नहीं बचा। 

रणनीतिक जीत भारत की
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिखाया कि अच्छी योजना, स्वदेशी तकनीक और मजबूत एकीकरण से छोटी-मोटी शुरुआती असफलताओं को भी पलटकर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है. जॉन स्पेंसर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने हवाई श्रेष्ठता हासिल कर पाकिस्तान को ऑपरेशन करने लायक ही नहीं छोड़ा. यह संघर्ष दिखाता है कि भविष्य के युद्धों में सिस्टम की मजबूती और निरंतर दबाव कितना निर्णायक साबित होता है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button