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गैस सिलेंडर की कीमत में वृद्धि का खतरा, सरकारी सब्सिडी पर असर की संभावना, रिपोर्ट ने किया चिंता का इज़ाफा

नई दिल्ली

 पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे भारत के आम लोगों और कंपनियों की जेब पर दिखने लगा है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो वित्त वर्ष 2027 तक एलपीजी (LPG) पर होने वाला अंडर-रिकवरी यानी घाटा करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। अंडर-रिकवरी का मतलब होता है कि तेल कंपनियां गैस सिलेंडर को जिस कीमत पर बेच रही हैं, वह उसकी वास्तविक लागत से कम है और यह अंतर उन्हें खुद वहन करना पड़ता है। इसका सीधा असर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की कमाई और मुनाफे पर पड़ रहा है।

दरअसल, कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर काफी ऊंची बनी हुई हैं, जबकि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा गया है। इससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। अनुमान है कि अगर कच्चा तेल 120-125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है, तो पेट्रोल पर करीब ₹14 प्रति लीटर और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया से एलपीजी की सप्लाई में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं।

हालांकि, भारत ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से एलपीजी आयात बढ़ाकर सप्लाई को कुछ हद तक संतुलित किया है, लेकिन फिर भी कंपनियों का घाटा कम नहीं हो पा रहा है। इसका असर केवल गैस सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद (फर्टिलाइजर), केमिकल और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे कई सेक्टर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। खासकर उर्वरक उद्योग में अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।

इसी वजह से सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ने की संभावना है। ICRA का अनुमान है कि FY2027 में फर्टिलाइजर सब्सिडी ₹2.05 लाख करोड़ से ₹2.25 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा बजट से काफी ज्यादा है। वहीं, केमिकल और पॉलिमर सेक्टर में भी लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव रहेगा, हालांकि कुछ स्पेशलिटी केमिकल कंपनियां अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकती हैं।

बढ़ती ऊर्जा कीमतें और सप्लाई में अनिश्चितता आने वाले समय में कई सेक्टर्स की कमाई पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, सरकार और कंपनियां स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर आम उपभोक्ता तक भी पहुंच सकता है।

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