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विदेश

ट्रंप का जर्मनी पर दोहरा हमला: सैनिकों की वापसी और कारों पर 25% टैरिफ का कड़ा फैसला

वाशिंगटन

जर्मनी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख एक बार फिर सख्त दिख रहा है. उन्होंने साफ कहा है कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या सिर्फ 5 हजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा कटौती की जाएगी. यानी जो शुरुआत 5 हजार सैनिकों की वापसी से हो रही है, वो आगे और बड़ी हो सकती है. इससे पहले ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का भी ऐलान किया था, जिसका असर खासतौर पर जर्मनी पर पड़ सकता है। 

देखा जाए तो ट्रंप की नाराजगी की वजह व्यापारिक समझौतों का सही से पालन न होना है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, उन्होंने खुलेआम कहा है कि यूरोपीय संघ ने वादों को निभाया नहीं है, इसलिए अब अगले हफ्ते से वहां बनने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैक्स लगाया जाएगा. जर्मनी, जो गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है. असल में सारा मामला फ्लोरिडा में खुला, जहां पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने दो-टूक कहा, '5 हजार का आंकड़ा तो बहुत छोटा है, हम इससे कहीं ज्यादा सैनिकों की छुट्टी करने वाले हैं और सेना में बड़ी कटौती करेंगे। 

हैरानी की बात ये है कि खुद पेंटागन ने पहले सिर्फ 5 हजार सैनिकों की बात कही थी, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने सबको सोच में डाल दिया है. अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. कई बड़े नेताओं का मानना है कि अगर अमेरिकी सैनिक जर्मनी छोड़कर चले गए, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन को अपनी ताकत दिखाने का खुला मौका मिल जाएगा. खासकर तब, जब यूक्रेन और रूस की जंग को 5 साल पूरे होने वाले हैं। 

क्या अकेले पड़ जाएंगे यूरोपीय देश?
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस पर बहुत ही शांत तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि सैनिकों को वापस बुलाने की बात तो ट्रंप सालों से कर रहे थे, इसलिए ये कोई नई बात नहीं है. उनका मानना है कि अब यूरोप के देशों को खुद अपनी सुरक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी जिम्मेदारी खुद संभालनी होगी. हालांकि, उन्होंने ये भी याद दिलाया कि अमेरिकी सैनिकों का जर्मनी में होना सिर्फ हमारे लिए नहीं, बल्कि खुद अमेरिका के फायदे के लिए भी है। 

पेंटागन की मानें तो इन सैनिकों की वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी कर ली जाएगी. फिलहाल जर्मनी में करीब 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो वहां के बड़े मिलिट्री बेस और एयर बेस की सुरक्षा संभालते हैं. जानकारों का कहना है कि सैनिकों का जाना एक अलग बात है, लेकिन इससे जो दुनिया को मैसेज जाएगा वो काफी गंभीर हो सकता है. ट्रंप की ये नाराजगी ईरान के मामले में भी देखी जा रही है, जहां उन्हें लगता है कि यूरोपीय देशों ने उनका साथ नहीं दिया। 

अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप का ये 'हंटर' जर्मनी की तिजोरी और उसकी सुरक्षा पर कितना भारी पड़ता है. एक तरफ सैनिकों की घर वापसी का दबाव और दूसरी तरफ कारों पर 25% का तगड़ा टैक्स, ट्रंप ने साफ मैसेज दे दिया है कि अब वो 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के लिए किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं. अब देखना ये होगा कि क्या इस फैसले के बाद यूरोप अपने दम पर अपनी सुरक्षा कर पाएगा या फिर उसे अमेरिका के आगे झुकना पड़ेगा?

 

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