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रसोई गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड महंगा, रेट में 10–12% तक बढ़ोतरी

पटना

 बिहार की राजधानी पटना में होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। मार्च महीने की शुरुआत से ही व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब शहर की रसोई पर दिखने लगा है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं की मुश्किलें बढ़ गई है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ने से कोयला-लकड़ी के सहारे रेस्टोरेंट होटल होने लगे हैं। जो होटल, रेस्टोरेंट ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने के पहले से व्यावसायिक गैस सिलेंडर का उठाव कर रहे थे। इनको भी उनके पूर्व की मांग का 70% ही आपूर्ति की जा रही है। मतलब 30% सिलेंडर के बदले उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा साधनों लकड़ी- कोयला भट्टी, इंडक्शन का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

पॉकेट पर सीधा वार, खानपान की नई कीमतें
गैस की कीमत बढ़ने से 5 रुपए की रोटी 7 रुपए की हो गई है। छोटी दुकानों में 10 रुपए का समोसा अब 15 से 20 रुपए पीस मिल रहा है। एलपीजी की कीमत बढ़ने और नहीं मिलने से स्ट्रीट वेंडरों पर दोहरी मार पड़ी है। चाय की कीमतों में इजाफा हुआ है। चाउमीन वाले 5 से 10 कीमत बढ़ा दिए हैं। इनका कहना है कि ब्लैक में खरीदना नहीं चाहते और गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने तक दुकान बंद करनी पड़ती है।

    रोटी: पहले 5 रुपए में मिलने वाली रोटी अब 7 रुपए की
    समोसा: 10 रुपए वाला समोसा अब बाजार में 15-20 रुपए की
    चाय: 10 रुपए से बढ़कर 15-20 रुपए तक पहुंच गई
    चाउमीन: दाम में 5-10 रुपए तक का इजाफा देखा जा रहाकु
    खाने-पीने की चीजों में औसतन 10-12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी

छोटे कारोबारियों की हालत को और भी खराब
इस क्राइसिस से छोटे कारोबारियों की हालत तो और भी खराब है। एक चाय विक्रेता ने बताया कि चाय की कीमत पहले ही दस रुपए से बढ़कर 15 रुपए की गई। कुछ दुकानदार 20 रुपए भी कर रहे हैं। लेकिन इससे ग्राहकों की संख्या में कमी आने लगी है। अगर ग्राहकों की संख्या में कमी आई तो कारोबार समेटने या कोई दूसरा रोजगार करने पर विचार करेंगे। इससे खाने-पीने के सामानों की कीमतों में कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक इजाफा तय है। मिठाइयों से लेकर रेस्टोरेंटों के मैन्यू की कीमतों, हॉस्टल के मेस के मैन्यू से लेकर स्ट्रीट फूड तक सब कुछ महंगा लग रहा है।

कोयले की मांग बढ़ने से कीमत में इजाफा
एलपीजी किल्लत से कोयले की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। 18 से 20 रुपए किलो बिकने वाला कोयला की कीमत 30 से 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। अच्छे और गुणवत्ता वाले कोयले की कीमत इससे भी अधिक लगाई जा रही है। कोयले को लेकर दुकानदार कोयले के थोक व्यापारियों के यहां एडवांस बुकिंग तक करने लगे है। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपए किलो के बीच पहुंच गई है।

स्ट्रीट वेंडरों के रोजी-रोजगार पर असर
पटना के ढाबों और स्ट्रीट वेंडरों के पास पांच किलोग्राम के छोटा गैर सब्सिडी प्राप्त गैस सिलेंडरों के साथ-साथ घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर है। स्ट्रीट वेंडरों द्वारा घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करना अवैध है। लेकिन, पटना की छोटी दुकानों में सड़कों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। कंकड़बाग में चाउमिन विक्रेता ने बताया कि छोटा गैस सिलेंडर महंगा भी पड़ता है। इसमें वैसा ताव नहीं मिलता है जैसा ताव 14.2 किलोग्राम गैस सिलेंडर में मिलता है। इसलिए हम मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का ही उपयोग ठेला पर कर रहे है।

ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है।

ईरान-अमेरिका युद्ध का साइड इफेक्ट
बिहार एलपीजी वितरक संघ के महासचिव रामनरेश सिन्हा के मुताबिक ईरान-अमेरिका युद्ध के पहले पटना में लगभग 5 हजार व्यावसायिक गैस सिलेंडर की खपत थी। ये फिलहाल 3000-3500 के बीच रह गई है। पटना के होटलों- रेस्टोरेंटों में एक बार फिर से लकड़ी, कोयला की खपत में इजाफा हो गया है। पटना के रेस्टोरेंट कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल करने लगे हैं।

 

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