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देश

कर्नाटक में शृंगेरी सीट पर पुनः गिनती, BJP का कहना- कांग्रेस से 56 वोट अधिक मिले

बेंगलुरु
कर्नाटक के शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में हाई कोर्ट के निर्देश पर कराए गए पोस्टल बैलेट की री-काउंटिंग ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. भाजपा के उम्मीदवार डी. एन. जीवाराज ने दावा किया है कि वह 56 वोटों से आगे हैं, जबकि कांग्रेस ने पूरी प्रक्रिया को सिस्टमेटिक क्राइम और साजिश करार दिया है। 

बीजेपी नेता जीवाराज ने कांग्रेस के मौजूदा विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के निर्वाचन को चुनौती दी थी, जिन्होंने शृंगेरी विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में मात्र 201 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी. अपनी याचिका में जीवाराज ने राजेगौड़ा की जीत की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि लगभग 300 पोस्टल बैलेट को गलत तरीके से खारिज किया गया था. याचिकाकर्ता के मुताबिक, यदि इन मतों की गिनती सही ढंग से की जाती, तो परिणाम अलग हो सकते थे, विशेषकर तब जब जीत का अंतर खारिज किए गए मतों की संख्या से कम है। 

निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक यदि जीत का अंतर खारिज किए गए पोस्टल बैलेट से कम होता है, तो उनकी पुन: जांच और गिनती की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है. कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस आर नटराज ने भाजपा के पराजित उम्मीदवार डी.एन. जीवाराज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए  रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को निर्देश दिया था कि 279 खारिज किए गए पोस्टल बैलेट की फिर से जांच की जाए। 

हाई कोर्ट ने दिए थे री-काउंटिंग के आदेश
इस सीट पर कुल 1,822 पोस्टल बैलेट वोट पड़े थे. हाई कोर्ट के 6 अप्रैल के आदेश के मुताबिक, चुनाव अधिकारियों ने खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट्स की दोबारा जांच की और 1,543 पोस्टल बैलेट वोटों की री-काउंटिंग की. इस प्रक्रिया में कांग्रेस उम्मीदवार डी. टी. राजेगौड़ा के वोट 569 से घटकर 314 रह गए, यानी 255 वोटों की बड़ी कमी आई. वहीं जीवाराज के वोट 692 से घटकर 690 हुए. इस तरह शृंगेरी विधानसभा सीट पर बीजेपी के जीवाराज, कांग्रेस के डी. टी. राजेगौड़ा से 56 वोटों से आगे निकल गए। 

हालांकि, परिणाम की घोषणा में देरी को लेकर विवाद और गहरा गया है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस परिणाम रोकने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रही है ताकि उसके हारे उम्मीदवार  डी. टी. राजेगौड़ा को फिर से अदालत में जाने का मौका मिल सके. दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट ने केवल री-काउंटिंग करने और उसकी रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था, न कि नतीजे घोषित करने का। 

कांग्रेस ने पूरे मामले को बताया बड़ी साजिश
इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने पूरे मामले को बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि यह देशभर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला सिस्टेमैटिक क्राइम है. उन्होंने आरोप लगाया कि बैलेट बॉक्स खोलने से लेकर हस्ताक्षरों के सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. शिवकुमार ने कहा कि वे सभी रिपोर्ट्स का अध्ययन कर रहे हैं और आगे इस मुद्दे को उठाएंगे. वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद पारदर्शी तरीके से मतगणना हुई है और जीवाराज को जनता का स्पष्ट जनादेश मिला है। 

अब अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को लेना है
उन्होंने कांग्रेस पर परिणाम रोकने और अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया. भाजपा नेता आर. अशोक ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह री-काउंटिंग कांग्रेस के काले चेहरे को उजागर करती है और यह लोकतंत्र की जीत है. भाजपा उम्मीदवार डी. एन. जीवाराज ने कहा कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों से इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ी है और अब सच्चाई सामने सबके सामने आ गई है. उन्होंने बताया कि वोटों की वैधता की जांच के बाद उन्हें बहुमत मिला है और अब अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग को लेना है। 

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुधीर कुमार मुरली ने चिक्कमगलूर टाउन पुलिस स्टेशन में जीवाराज और तत्कालीन चुनाव अधिकारी के खिलाफ वोटों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने इस मामले में एनसी केस दर्ज कर लिया है. अब इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर निर्भर करेगा, जबकि दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। 

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