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मध्यप्रदेश

4 मई तक मध्य प्रदेश में खराब रहेगा मौसम, बाहर जाने से पहले जानें यह चेतावनी

भोपाल 
 भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है.  प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. जिससे कई शहरों के अधिकतम तापमान में 2 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई. इससे जहां एक ओर लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और बेमौसम बरसात ने कई जिलों में जनजीवन को भी प्रभावित किया. जबलपुर में तेज आंधी के बीच बरगी डैम में क्रूज पलटने से कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है। 

आंधी-बारिश का डबल अटैक
राजधानी भोपाल में दोपहर बाद मौसम ने करवट बदली और करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई. सड़कों पर पानी भर गया. वहीं टीकमगढ़ में आंधी-तूफान का असर इतना तेज रहा कि कंट्रोल रूम का टावर गिर गया. गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई. यहां 15 से 20 मिनट तक जमकर ओलावृष्टि भी हुई, जिससे खेत और फसलें प्रभावित हुईं. श्योपुर में तेज आंधी के चलते एक होटल का शेड उड़ गया, जिससे करीब 15 लोग घायल हो गए। 

इसके अलावा रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, सागर, रायसेन, बालाघाट, दमोह और ग्वालियर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की गई. कई जगह तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे तक उखड़ गए, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. जबलपुर में भी तेज हवाओं के चलते क्रूज शिप डूबने से बड़ा हादसा हो गया। 

तापमान में गिरावट, कई जिलों में मिली राहत
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर तापमान पर देखने को मिला.  सीधी में अधिकतम तापमान गिरकर 31.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे दिन-रात के तापमान का अंतर घटकर महज 6.5 डिग्री रह गया. वहीं रीवा में 33.2 डिग्री, पचमढ़ी में 33.4 और सतना में 33.5 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. हालांकि, प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है. खरगोन में पारा 42.6 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रायसेन, बैतूल और गुना में भी 41 डिग्री के आसपास तापमान दर्ज किया गया. इंदौर और उज्जैन में पारा करीब 40 डिग्री रहा, जबकि जबलपुर में 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। 

मौसम के पीछे ये सिस्टम कर रहे काम
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, '' मौसम में इस बदलाव के पीछे कई सक्रिय सिस्टम जिम्मेदार हैं. कश्मीर के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने वातावरण में हलचल बढ़ाई है. इसके साथ ही उत्तर पंजाब और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक फैली हुई है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर प्रदेश में ला रही है. इसी वजह से प्रदेश में अचानक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थितियां बन रही हैं। 

किसानों की बढ़ी चिंता, फसल पर बढ़ा खतरा
प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू होने से भले ही आम लोगों को राहत मिली है, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बता दें कि कई जिलों में मंडियों और उपार्जन केंद्रों पर गेहूं की फसल खुले में रखी हुई है. अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल के भीगने और खराब होने का खतरा मंडरा रहा है. यदि मौसम ऐसा ही बना रहा, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

मध्यप्रदेश में 4 मई तक आंधी और बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार  ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना समेत सागर और शहडोल संभाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. जबकि कुछ जिलों में हल्की बारिश और बौछारो की चेतावनी दी गई है. वहीं 2 से 4 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना जताई गई है। 

इसके साथ ही शिवपुरी, ग्वालियर, रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग में भी मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है. इस दौरान लोगों को मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. किसानों को अपनी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और ढंककर रखने की सलाह दी गई है। 

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