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धुर्वा में फेज-2 विकास की तैयारी, आधुनिक आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्र का होगा विस्तार

रांची

रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी की है। राज्य सरकार ने धुर्वा स्थित एचईसी से 500 एकड़ अतिरिक्त जमीन लेने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी फेज 2 के रूप में विकसित किया जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य स्मार्ट सिटी का क्षेत्रफल बढ़ाकर आधुनिक आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र का विस्तार करना है। यह प्रस्तावित जमीन मौजूदा 656 एकड़ के प्रोजेक्ट के अलावा होगी। रांची स्मार्ट सिटी 656 एकड़ में धुर्वा क्षेत्र में विकसित की जा रही है, जो पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। अतिरिक्त जमीन मिलने से स्मार्ट सिटी का दायरा बढ़ने के साथ यहां कई अत्याधुनिक सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।

भारी उद्योग मंत्रालय प्रस्ताव पर कर रहा विचार
अतिरिक्त जमीन लेने से राज्य सरकार ने एचईसी से बातचीत भी शुरू की है। बीते कुछ माह पहले रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने नई दिल्ली में केंद्र सरकार से इसे लेकर चर्चा की थी। अब भारी उद्योग मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। जानकारी के अनुसार अब एचईसी जमीन चिन्हित कर रहा है। इसके तहत एचईसी को बड़ी राशि मिलने की संभावना है, जो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे निगम के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। इसके अलावा मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के बकाया भुगतान और मशीनों के आधुनिकीकरण का रास्ता खुलेगा। एचईसी के पास बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त जमीन है, जहां अतिक्रमण की समस्या भी बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि इस जमीन का स्मार्ट सिटी में उपयोग कर इसे व्यवस्थित विकास में बदला जा सकता है।

शहर के विकास का नया मॉडल होगा तैयार
प्रस्तावित अतिरिक्त 500 एकड़ जमीन में एक ही स्थान पर आवासीय, व्यावसायिक या संस्थागत उपयोगों वाली गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी है। इससे छोटे कैफे, बुटीक, कंसल्टेंसी फर्म व रिटेल आउटलेट्स के लिए नए मौके खुलेंगे। स्मार्ट सिटी के विस्तार से धुर्वा, हटिया व जगन्नाथपुर क्षेत्र में संरचनात्मक ढांचे में भी सुधार होगा। चौड़ी सड़कें, 24 घंटे बिजली व हाईटेक ड्रेनेज सिस्टम से आसपास के क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा। अतिरिक्त जमीन में स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन द्वारा विकास का नया मॉडल भी तैयार करने का प्रस्ताव है। यानी छोटे-छोटे प्लॉट तैयार होंगे, जिससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

वर्तमान में जिस 656 एकड़ जमीन में स्मार्ट सिटी विकसित हो रही है, उसकी सबसे बड़ी बाधा जमीन का दाखिल-खारिज थी। वर्षों पहले एचईसी को मिली जमीन का म्यूटेशन नहीं कराया गया था, जिससे वर्ष 2016 में प्रोजेक्ट शुरू होने के बावजूद प्लॉट आवंटन और निर्माण कार्य ठप पड़ा था। पिछले माह ही नामकुम अंचल में इस तकनीकी खामी को दूर करते हुए 656 एकड़ में से करीब 450 एकड़ जमीन का म्यूटेशन पूरा कर लिया है। शेष जमीन पर भी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

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