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मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियां

भोपाल.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विशेष रूप से महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों के जीवन में ठोस बदलाव लाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। प्रदेश सरकार नारी शक्ति के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी संकल्प को मूर्त रूप देते हुए मध्यप्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं के हित में निर्णय लिये गये हैं। इन निर्णयों से ‘नारी शक्ति वंदन’ की भावना धरातल पर साकार हो रही है।

राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को ₹3,000 से बढ़ाकर ₹4,000 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप प्रदेश में लगभग 708.8 करोड़ रुपये पारिश्रमिकका भुगतान किया गया है। इससे महिलाओं को लगभग 344.5 करोड़ रुपये का सीधा लाभ हुआ है। यह वृद्धि केवल आय बढ़ाने का उपाय नहीं, बल्कि ग्रामीण और वनवासी महिलाओं को सम्मानजनक आर्थिक पहचान देने का प्रयास है। संग्राहकों को कुल 132.42 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया गया है। इसमें महिला संग्राहकों का हिस्सा लगभग 64.36 करोड़ रुपये है।

तेंदूपत्ता संग्रहण जैसे पारंपरिक कार्य को आधुनिकता से जोड़कर सरकार ने यह सिद्ध किया है कि नारी शक्ति संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से समाज के हर स्तर पर परिवर्तन ला सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, सम्मान और सामाजिक स्थिति को भी नई ऊंचाई दे रही है।

तेंदूपत्ता संग्रहण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में कुल 40.8 लाख संग्राहकों में लगभग 19.8 लाख महिलाएं हैं। इस तरह महिलाओं की भागीदारी लगभग 48.6% है। स्पष्ट है कि यह केवल वन आधारित आजीविका नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी एक बड़ा माध्यम है।

‘नारी शक्ति वंदन’ मध्यप्रदेश में एक जीवंत अभियान बन चुका है, जहां महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सहभागी हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार ने बहुआयामी योजनाएं लागू की हैं। इनमें ‘चरण पादुका’ योजना, सामाजिक सुरक्षा लाभ और वन समितियों के माध्यम से सामुदायिक सशक्तिकरण के साथ ही ग्राम विकास एवं वन संरक्षण के लिए 35.31 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

 

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