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मध्यप्रदेश

ग्वालियर में प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछेगा, 5 जिलों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली

ग्वालियर
 मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछाया जाएगा। इनपर 18 से ज्यादा जलमग्नीय पुलों का प्लान तैयार किया गया है। इससे बारिश में टापू बनने वाले गांवों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) ने ग्वालियर चंबल संभाग की प्रमुख नदियों- सांख, क्वारी, सिंध और पार्वती पर जलमग्नीय (सबमर्सिबल) पुलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल बारिश में कट जाने वाले गांवों को मुख्य सडकों से जोड़ेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा। ग्वालियर जिले के तीन प्रमुख पुलों के साथ संभाग के भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनमें से कई को हरी झंडी मिल गई है।

ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है।

मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है।

वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा।

मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे।

शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है।

सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है।

क्या होते हैं जलमग्नीय पुल
ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं।

हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम :
हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।

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