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मध्यप्रदेश

एमपी टेंडर घोटाला? – हर डिजिटल मूल्यांकन टेंडर में एक ही नाम: MPCON पर गंभीर सवाल

एमपी टेंडर घोटाला? – हर डिजिटल मूल्यांकन टेंडर में एक ही नाम: MPCON पर गंभीर सवाल

GFR, CVC और MP Procurement नियमों की अनदेखी? कॉपी-पेस्ट टेंडर, फर्जी प्रतिस्पर्धा, गलत वर्गीकरण और संदिग्ध प्रमाणपत्र पर उठे सवाल

भोपाल 
मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों—DAVV इंदौर, SVVV उज्जैन, MPBOU तथा वर्तमान डिजिटल मूल्यांकन टेंडर—में एक चौंकाने वाला समान पैटर्न सामने आया है। शिकायतों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में बार-बार MPCON को लाभ पहुंचाने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

 सबसे बड़ा सवाल – हर टेंडर में MPCON ही क्यों?
    •    हर टेंडर में ऐसी पात्रता शर्तें, जो केवल MPCON से मेल खाती हैं
    •    अन्य सक्षम संस्थाएं स्वतः बाहर
    •    परिणाम: एक ही संस्था के पक्ष में झुकी प्रक्रिया

SVVV टेंडर में बड़ा खुलासा (Goods vs Services घोटाला)
    •    टेंडर को “Goods” में डाला गया
    •    जबकि कार्य:
    •    डिजिटल मूल्यांकन सॉफ्टवेयर
    •    स्कैनिंग, IT सेवाएं, मैनपावर

 स्पष्ट रूप से Service Contract, फिर भी Goods में डालना
 पूरा टेंडर कानूनी रूप से संदिग्ध

📄 DAVV → SVVV: कॉपी-पेस्ट टेंडर का खेल
    •    दोनों टेंडरों में समान भाषा, समान शर्तें
    •    केवल नाम बदला गया

संकेत: टेंडर स्वतंत्र नहीं, बल्कि पूर्व-निर्धारित डिजाइन

MPSOS केस – पहले भी बना पैटर्न
    •    3 बिड प्राप्त
    •    2 बिड अस्वीकृत
    •    केवल MPCON योग्य घोषित  

फिर भी:
    •    अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं
    •    आरोप: फर्जी/सपोर्ट बिड से टेंडर दिलाया गया

 फर्जी प्रतिस्पर्धा का आरोप
    •    AFC India Limited, AP Productivity Council, APITCO Ltd.
    •    पात्रता नहीं, फिर भी नियमित भागीदारी

 आरोप:
    •    डमी/फर्जी बिड
    •    MPCON के पक्ष में सपोर्ट
    •    कृत्रिम प्रतिस्पर्धा

नियमों का खुला उल्लंघन?
    •    केवल 1 पात्र बोलीदाता (MPCON)
    •    जबकि नियम: कम से कम 3 योग्य बिड आवश्यक
    •    फिर भी टेंडर प्रक्रिया जारी

 सवाल: टेंडर रद्द क्यों नहीं किया गया?

सबसे बड़ा विवाद – CMMI Level 3 प्रमाणन
    •    सभी टेंडरों में CMMI Level 3 अनिवार्य
    •    लेकिन:
    •    MPCON के पास स्वयं का CMMI प्रमाणन उपलब्ध नहीं
    •    कथित रूप से थर्ड-पार्टी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया

 गंभीर आरोप:
    •    थर्ड-पार्टी CMMI सर्टिफिकेट टेंडर शर्तों के विरुद्ध
    •    आधिकारिक CMMI रजिस्ट्री में सत्यापन स्पष्ट नहीं
सत्यापन हेतु: https://pars.cmmiinstitute.com

यह स्थिति:
    •    फर्जी/अमान्य दस्तावेज प्रस्तुत करने की श्रेणी में
    •    जो नियमों के अनुसार सीधी ब्लैकलिस्टिंग का आधार बनती है

किन नियमों का उल्लंघन?
    •    GFR 2017 (Rule 144, 160, 173)
    •    CVC Guidelines (Fair Procurement)
    •    MP Procurement Rules 2023
    •    Competition Act, 2002
    •    संविधान अनुच्छेद 14 (समानता)

बड़े सवाल (Public Interest Questions)
    •    हर टेंडर में MPCON ही क्यों?
    •    CMMI शर्त होने के बावजूद प्रमाणन कैसे स्वीकार किया गया?
    •    एक ही पात्र बोलीदाता होने पर टेंडर रद्द क्यों नहीं हुआ?
    •    कॉपी-पेस्ट टेंडर किस स्तर पर तैयार हुए?
    •    क्या पूरी प्रक्रिया पूर्व-निर्धारित थी?
बड़ी मांग – अब कार्रवाई जरूरी
    •    उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा तत्काल जांच (Enquiry)
    •    MPCON की ब्लैकलिस्टिंग (False/Non-compliance आधार पर)
    •    सभी सपोर्ट बिड देने वाली संस्थाओं की ब्लैकलिस्टिंग
    •    सभी विभागों में MPCON को दिए गए टेंडरों की राज्यस्तरीय जांच
    •    संदिग्ध टेंडरों का तत्काल निरस्तीकरण

अंतिम चेतावनी (Legal Position)

“यदि टेंडर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज, प्रतिबंधात्मक शर्तें और कृत्रिम प्रतिस्पर्धा सिद्ध होती है, तो यह न केवल अवैध है बल्कि संबंधित संस्था की ब्लैकलिस्टिंग अनिवार्य हो जाती है।”

यह मामला अब सिर्फ टेंडर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का सवाल बन चुका है।

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