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मध्यप्रदेश

राज्य स्थापना दिवस पर राज्यपाल पटेल का संदेश, विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव

राज्य स्थापना दिवस समारोह, विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल पटेल राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त कार्यक्रम में हुए शामिल
लोक भवन में "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" के तहत हुआ आयोजन

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्यों का स्थापना दिवस कार्यक्रम, भारत की विविधता में एकता की शक्ति का उत्सव है। यह एक दूसरे की कला, संस्कृति, इतिहास और विकास से परिचय कराता है। सभी में आपसी सदभाव, प्रेम और भाईचारा बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आयोजन, देश की विभिन्नता में एकता की शक्ति को पहचानने और भावी पीढ़ी को परिचित कराने का भी माध्यम है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह केवल तिथियों का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा का उत्सव भी है, जो हमें अपनी विरासत को संजोते हुए विकास के नए आयाम स्थापित करने की प्रेरणा देता है।

राज्यपाल पटेल बुधवार को लोक भवन में राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने तीनों राज्यों के निवासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। लोक भवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" की संकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहनीय पहल है। यह विकसित भारत निर्माण की संकल्पना को साकार करने सभी राज्यों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। राज्यपाल पटेल ने तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने में योगदान देने का आव्हान भी किया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महापुरूषों का किया स्मरण

राज्यपाल पटेल ने राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह में तीनों राज्यों के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महापुरूषों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में राजस्थान के बालमुकुंद बिस्सा, अर्जुन लाल सेठी, केसरी सिंह बारहठ, विजय सिंह पथिक, जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री, सागरमल गोपा और माणिक्य लाल वर्मा जैसे सेनानियों का योगदान अमूल्य है। आजादी के संघर्ष में उड़ीसा के लक्ष्मण नाइक, मालती चौधरी, जमुनीबती पट्टनायक, सुरेंद्र साई और अटल बिहारी आचार्य का अदम्य साहस, देशभक्ति का प्रदर्शन राष्ट्र भक्तों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। हिमाचल प्रदेश में राम सिंह पठानिया ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। कांशीराम, जिन्हें “पहाड़ी गाँधी” कहा जाता है, ने जनजागरण और संघर्ष के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इसी प्रकार डॉ. वाई. एस. परमार, पदम देव, शिवानन्द रमौला, पूर्णानंद, सत्यदेव, सदाराम चंदेल, दौलत राम तथा ठाकुर हजारा सिंह का संघर्ष और बलिदान हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है। राज्यपाल पटेल ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं से महान सेनानियों के त्याग, साहस और समर्पण से प्रेरणा लेने, राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने की अपील भी की।

तीनों राज्यों की कला और संस्कृति अद्भुत

राज्यपाल पटेल ने कहा कि राजस्थान की भक्ति परंपरा, मीरा के भजन, भव्य किले, लोक कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, थार मरुस्थल और विभिन्न विश्व धरोहर स्थल भारत की वैश्विक पहचान है। भारत की आध्यात्मिक और स्थापत्य विरासत में भगवान जगन्नाथ की पावन भूमि ओडिशा और कोणार्क का सूर्य मंदिर हमारी सांस्कृतिक गरिमा के प्रतीक हैं। देवभूमि के रूप में प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ पर्यावरण, धार्मिक आस्थाएं और पौराणिक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध कर राष्ट्रीय पहचान को गौरवान्वित करती हैं।

सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत हमारा लक्ष्य

राज्यपाल पटेल ने कहा कि हमारी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ भले ही भिन्न हों लेकिन हमारा लक्ष्य सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओडिशा के खनिज संसाधन और औद्योगिक विकास, राजस्थान की नव-करणीय ऊर्जा, पर्यटन विकास तथा हिमाचल प्रदेश के पर्यावरणीय संरक्षण के समन्वित प्रयासों से ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण संभव होगा।

तीनों राज्यों की लोक, शास्त्रीय और संस्कृति की दिखी झलक

राज्यपाल पटेल के समक्ष राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश राज्य की लोक संस्कृति और शास्त्रीय परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गई। उन्होंने सभी आर्कषक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। राज्यपाल पटेल ने समारोह की सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महिला और बेटियों की संपूर्ण सहभागिता को महिला सशक्तिकरण की मिसाल बताया। समारोह में राजस्थान सांस्कृतिक समाज की ओर से घूमर और कठपुतली नृत्य प्रस्तुत किया गया। राजस्थान राज्य के इतिहास और कला संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। ओडिशा राज्य के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभम्पति का संदेश और राज्य की लघु फिल्म का प्रसारण किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुति के अंतर्गत शास्त्रीय नृत्य ओडिसी और उत्कल समाज की ओर से भगवान जगन्नाथ की स्तुति नृत्य हुआ। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता का लघु संदेश और लोक भवन हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिकता पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। हिमाचल समाज जनसेवा समिति की ओर से राज्य की लोक, कला और भक्ति आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।

राज्यपाल पटेल का राजस्थान, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के मध्यप्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया। राज्यपाल पटेल को राजस्थानी पगड़ी, ओडिशा हस्तशिल्प, हिमाचली टोपी और फलों की टोकरी भेंट की गई। संयुक्त समारोह में पूर्व डी.जी.पी संतोष कुमार रावत, रमेश अग्रवाल, पुरूषोत्तम, तीनों राज्यों के प्रदेश में निवासरत नागरिक और लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 

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