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डेजर्ट नेशनल पार्क में नई स्पाइडर प्रजाति मिली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

 जैसलमेर

राजस्थान के जैसलमेर में स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क से एक बड़ी खोज सामने आई है. इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर की नई प्रजाति ‘मोग्रस शुष्का' को खोजा है. इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है.

यह शोध European Journal of Taxonomy और Zootaxa जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है. इससे यह स्पष्ट है कि यह खोज वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

चार नई प्रजातियों की पहचान
इस अध्ययन में सिर्फ ‘मोग्रस शुष्का' ही नहीं बल्कि तीन अन्य नई प्रजातियों की भी पहचान की गई है. इनमें मोग्रस पुणे लैंगेलुरिलस सह्याद्री और लैंगेलुरिलस उदयपुरीन्सिस शामिल हैं. यह खोज दर्शाती है कि रेगिस्तान में अभी भी कई अनदेखे जीव मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘मोग्रस शुष्का' अत्यधिक गर्मी कम नमी और रेतीले माहौल में आसानी से खुद को ढाल लेती है. यह प्रजाति Rajasthan और Gujarat के शुष्क इलाकों में पाई जाती है.

पुरानी प्रजातियों की भी नई जानकारी
शोध में कुछ पहले से ज्ञात प्रजातियों की अधूरी जानकारी भी पूरी की गई. मोग्रस राजस्थानेंसिस के नर का पहली बार वैज्ञानिक विवरण मिला जबकि कुछ अन्य प्रजातियों की मादाओं का भी पहली बार वर्णन किया गया. एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि मोग्रस लारिसाए नामक मकड़ी जो पहले केवल कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में पाई जाती थी उसे पहली बार भारत में दर्ज किया गया.

पारिस्थितिकी में मकड़ियों की बड़ी भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि मकड़ियां कीटों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करती हैं और फूड चेन को संतुलित बनाए रखती हैं. दुनिया भर में मकड़ियां हर साल लगभग 300 मिलियन टन कीट खा जाती हैं.

रेगिस्तानी जैव विविधता का नया आयाम
डेजर्ट नेशनल पार्क अब सिर्फ गोडावण जैसे बड़े जीवों के लिए नहीं बल्कि सूक्ष्म जीव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है. यहां करीब 120 प्रकार की स्पाइडर प्रजातियां पाई जाती हैं जो इसकी समृद्ध पारिस्थितिकी को दर्शाती हैं.

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