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फ़िल्म जगत

समय रैना का छलका दर्द, कश्मीरी पंडितों के पलायन और अपने संघर्षों को किया याद

कॉमेडियन समय रैना फिर से सुर्खियों में हैं. इंडियाज गॉट लेटेंट के बंद होने के बाद उन्होंने शो स्टिल अलाइव किया. यहां समय का दर्द छलका. उन्होंने बचपन से लेकर अभी तक के अपनों संघर्षों को याद किया. पुरानी कड़वी यादों का जिक्र करते हुए वो इमोशनल भी हुए.

कश्मीरी पंडितों पर क्या बोले समय?
समय ने बताया कि वो कश्मीरी पंडित हैं. कश्मीर में हुए नरसंहार के वक्त उनके पेरेंट्स ने घाटी छोड़कर अच्छा किया था. वो कहते हैं- मेरे मम्मी-पापा की शादी कश्मीर में हुई थी. वो शानदार लाइफ जी रहे थे. मेरे पापा उस वक्त मीडिया में थे, न्यूज रिपोर्टर थे. डीडी कश्मीर के लिए काम करते थे. वो अच्छा कमाते थे. फिर वहां पर मिलिटेंसी हुई. 1991 में वो अपना सब कुछ छोड़कर कश्मीर से दिल्ली आए. लेकिन यहां उन्हें अच्छा नहीं लगा. क्योंकि वो पूरा वक्त कश्मीर में रहे थे. 1996 में वो दोबारा कश्मीर गए. फिर 1997 में मेरा जन्म हुआ. 1998 में एक दिन हमारे घर पर गोली चली. रातोरात हम वहां से भागे. हम हैदराबाद रहने लगे.

कॉमेडियन ने कहा– तभी लड़ो जब लड़ाई फेयर हो, वरना वहां से भागो. कश्मीरी पंडितों की ये बुद्धिमानी थी. हम कश्मीरी पंडित उस वक्त 5 प्रतिशत थे, अगर मेरे पेरेंट्स और बाकियों ने हथियार उठाया होता, तो सब मर गए होते. आज हमारी बहादुरी पर वीडियोज बनते. फिर अक्षय कुमार बनता कश्मीरी पंडित. वो बनाता- वो थे कश्मीर के वीर लोग. जिन्होंने अपना बलिदान दिया, लेकिन क्या होता उससे. लोगों की आंखों में लेजेंड बनते. कुछ नहीं होता मर गए होते सब. मुझे खुशी है कि कश्मीरी पंडितों ने तब घाटी छोड़ी. आज हम लोग जिंदा हैं और जहां भी हैं गर्दा उड़ा रहे हैं. अपने सर्वाइल को सबसे पहले देखना चाहिए.

समय रैना ने इंडियाज गॉट लेटेंट कंट्रोवर्सी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने तो उस एपिसोड में कुछ भी नहीं कहा था. वो एक कोने में चुपचाप बैठे हुए थे. समय बोले- हम कश्मीरी क्रॉसफायर में ही मरते हैं… उनका ये डायलॉग सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हंसने लगते हैं. समय ने कहा- हमें बस एक मजाक के लिए कठघरे में खड़ा किया गया. हर कोई गलती करता है.
 

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