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उत्तर प्रदेश

चना, सरसों और मसूर की खरीद 2 अप्रैल से शुरू, सीधे बैंक खाते में आएगा पैसा

लखनऊ

यूपी की योगी सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा कर दी है। चना, मसूर, सरसों और अरहर की खरीद के लिए रेट भी पिछली बार से बढ़ाकर घोषित किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए दलहनी और तिलहनी फसलों की सरकारी खरीद की कार्ययोजना जारी कर दी है। मंगलवार को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद लक्ष्यों का खुलासा किया। सरकार ने इस बार दालों और तिलहन के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसे किसानों के लिए एक 'सुरक्षा कवच' बताया गया है।

कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि की गई है। चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 225 रुपये अधिक है। इसी तरह मसूर पर 300 रुपये की वृद्धि के साथ 7000 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों पर 250 रुपये की वृद्धि के साथ 6200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव निर्धारित किया गया है। अरहर के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य मिलेगा।

खरीद लक्ष्य और अवधि
प्रदेश में इस वर्ष रबी फसलों की खरीद 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक यानी कुल 90 दिनों तक चलेगी। सरकार ने इस बार खरीद के बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं।मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन यानी कुल उत्पादन का 100% खरीदी होगी। सरसों 5.30 लाख मीट्रिक टन, चना 2.24 लाख मीट्रिक टन और अरहर 1.14 लाख मीट्रिक टन खरीद होगी।

पारदर्शिता के लिए 'आधार इनेबल्ड' व्यवस्था
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि पिछली सरकारों में दलहन-तिलहन की खरीद पर ध्यान नहीं दिया जाता था, लेकिन योगी सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है। वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित करने और बिचौलियों को बाहर रखने के लिए प्रत्येक क्रय केंद्र पर आधार-सक्षम पीओएस (PoS) मशीनें लगाई गई हैं। किसानों को उनकी उपज का भुगतान सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जाएगा।

6 एजेंसियां और 190 से अधिक क्रय केंद्र
खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 02 केंद्रीय एजेंसियां (नैफेड और एनसीसीएफ) और 04 राज्य स्तरीय एजेंसियां (यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस) तैनात की गई हैं। इस वर्ष नैफेड और एनसीसीएफ द्वारा सीधी खरीद के लिए 190 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है, जबकि राज्य एजेंसियां भी अपने केंद्र संचालित करेंगी। पिछले वर्ष इस योजना से 20 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हुए थे, जिसे इस वर्ष और बढ़ाने का प्रयास है।

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