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विदेश

अमेरिका ने ईरान पर छोड़ी 29,750 करोड़ की टॉमहॉक मिसाइल, ये क्यों है खास?

न्यूयॉर्क

अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले चार हफ्तों में 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी हैं. यह किसी एक अभियान में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह जानकारी अमेरिका की प्रसिद्ध थिंक टैंक सीएसआईएस (Center for Strategic and International Studies) की नई रिपोर्ट में दी गई है। 

हर टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 35 करोड़ रुपये) है. इस हिसाब से इन 850 मिसाइलों की कुल कीमत लगभग 30,000 करोड़ की आंकी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिसाइलें मुख्य रूप से दो गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियों और डिस्ट्रॉयर जहाजों से छोड़ी गईं. इन जहाजों में वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) लगे हैं. इस अभियान में क्षेत्र में उपलब्ध लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में इन लॉन्चरों को फिर से लोड नहीं किया जा सकता. जहाजों को मिसाइलें खत्म होने पर बंदरगाह वापस जाना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक फिर से भरने में समय लगेगा। 

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने एपिक फ्यूरी 2026 में सिर्फ पहले 4 हफ्तों में 850 टॉमहॉक दागी हैं. यह इतिहास का रिकॉर्ड है. इस से पहले किसी भी एक अभियान में इतनी मिसाइलें नहीं दागी गई हैं. 2003 के पूरे इराक युद्ध (Iraqi Freedom) में अमेरिका ने 802 मिसाइलें दागी थीं. बाकी पुराने अभियान की बात करें तो 1991 के डेजर्ट स्टॉर्म में 288 मिसाइल दागी गईं थीं। 

ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में?
टॉमहॉक अमेरिका की एक मध्यम दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. यह जमीन, जहाज और पनडुब्बी से छोड़ी जाती है और दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला करने की ताकत रखती है. 1972 में अमेरिकी नौसेना ने इसका विकास शुरू किया था. यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ पाता. शुरू में इसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर विकल्प खत्म कर दिया गया है. इसे TLAM, TASM, BGM-109G Gryphon जैसे कई नामों से भी जाना जाता है. यह 1983 से सेवा में है। 

टॉमहॉक के वेरिएंट

ब्लॉक 1: TLAM-N (न्यूक्लियर), TASM (एंटी-शिप) और ग्राउंड लॉन्च Gryphon
ब्लॉक 2: TLAM-C (सख्त टारगेट) और TLAM-D (नरम टारगेट) थे
ब्लॉक 3: GPS और बेहतर इंजन जोड़े गए, जिससे ईंधन कम लगता है और ज्यादा ताकत मिलती है
ब्लॉक 4: सबसे आधुनिक है – इसमें उड़ते समय नया लक्ष्य बदला जा सकता है

टॉमहॉक की खूबियां
रेंज 1,250 से 2,500 किलोमीटर तक (ब्लॉक IV में 1,600 किमी). स्पीड सबसोनिक (लगभग 800 किमी/घंटा). ऊंचाई समुद्र की सतह से चिपककर या 450 मीटर तक. वजन 1,315 किलोग्राम (लॉन्च वजन), लंबाई 5.55 से 6.25 मीटर. इसमें 454 किलोग्राम का पारंपरिक या पहले न्यूक्लियर वारहेड लगता है. गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल, TERCOM, GPS और टू-वे डेटालिंक है. सटीकता 10 मीटर से भी कम। 

यह मिसाइल 140 से ज्यादा अमेरिकी नौसेना के जहाजों (टिकॉन्डेरोगा क्रूजर, आर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर) और पनडुब्बियों (Ohio क्लास SSGN और SSN) से छोड़ी जा सकती है. ब्रिटेन की Royal Navy की Astute, Swiftsure और Trafalgar पनडुब्बियों पर भी लगी है. पहले ग्राउंड लॉन्च वर्जन Gryphon भी था, लेकिन 1991 में INF संधि के तहत नष्ट कर दिया गया. मुख्य ऑपरेटर अमेरिका और ब्रिटेन हैं. यह Mark 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम से लॉन्च होती है। 

मिसाइल का इतिहास
टॉमहॉक का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ, जहां 300 से ज्यादा दागी गईं. 2003 के इराक युद्ध में 800 से ज्यादा. 2018 में सीरिया में 59 मिसाइलें दागी गईं. अफगानिस्तान, सोमालिया, लिबिया और सीरिया में भी इस्तेमाल हुई. 2016 में 245 मिसाइलों को एंटी-शिप बनाने के लिए 434 मिलियन डॉलर का बजट दिया गया. अमेरिका की आर्मी अब इसे ग्राउंड लॉन्चर पर भी लगा रही है. यह मिसाइल बहुत महंगी लेकिन बेहद सटीक और सुरक्षित हमला करने वाली है, जो आधुनिक युद्ध में अमेरिका की सबसे अहम हथियारों में से एक है। 

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