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धर्म/ज्योतिष

रात के सन्नाटे में गूंजती घंटियां—मैहर माता मंदिर की अनसुनी कहानी

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर (मां शारदा धाम) आस्था, चमत्कार और रहस्यों का अनोखा संगम माना जाता है. विंध्य पर्वतमाला की त्रिकूट पहाड़ी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. नवरात्रि के दौरान यहां लाखों भक्त मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात है रात में अपने आप बजने वाली घंटियां. जिसका रहस्य आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करता है. आइए चैत्र नवरात्रि के खास मौके पर जानते हैं इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के बारे में.

रात में अपने आप बजती हैं घंटियां, क्या है रहस्य?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी रात में घंटियों के बजने की आवाज सुनाई देती है. कहा जाता है कि इस समय कोई भी इंसान मंदिर के अंदर मौजूद नहीं होता, फिर भी घंटियां बजती रहती हैं. भक्तों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि दैवीय संकेत है. माना जाता है कि रात के समय मां शारदा स्वयं मंदिर में विराजमान रहती हैं और उनकी पूजा होती है, जिसकी वजह से घंटियां बजती हैं.

आल्हा-ऊदल से जुड़ी है मान्यता
मैहर माता मंदिर का संबंध वीर योद्धा आल्हा-ऊदल से भी जोड़ा जाता है. लोककथाओं के अनुसार, आल्हा आज भी अमर हैं और वे रोज़ ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले मंदिर पहुंचकर मां शारदा की पूजा करते हैं. कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के पुजारी दरवाजे खोलते हैं, तो वहां ताजे फूल और पूजा के निशान मिलते हैं, जिससे इस रहस्य को और भी गहराई मिलती है.

त्रिकूट पर्वत पर बसा पवित्र धाम
यह मंदिर त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से पूरे मैहर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है. भक्त पैदल सीढ़ियों से या रोपवे के जरिए भी मंदिर तक पहुंच सकते हैं. यहां विराजमान मां शारदा को विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का स्वरूप माना जाता है, इसलिए छात्र-छात्राएं विशेष रूप से यहां दर्शन के लिए आते हैं.

नवरात्रि में उमड़ता है आस्था का सैलाब
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मैहर माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त मां से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं और मान्यता है कि सच्चे मन से मां को पुकारने पर हर इच्छा पूरी होती है. इसलिए मैहर माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्यमयी घटनाओं का केंद्र भी है. रात में बजती घंटियां, आल्हा-ऊदल की कहानी और दैवीय उपस्थिति की मान्यताएं इस मंदिर को और भी खास बनाती हैं.

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