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छत्तीसगड़

चिरायु टीम ने दिया एक परिवार को नया जीवन, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिली राहत चिरायु टीम की मदद से एक बच्चे को मिला नया जीवन, जन्मजात विकृति से जूझते परिवार की उम्मीद जगी

जब चिरायु टीम बनी एक परिवार की उम्मीद, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन

बिलासपुर
छह महीने पहले जन्मे एक नन्हे बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना उसके माता-पिता के लिए किसी सपने से कम नहीं था। जन्म से ही कटा-फटा होंठ और तालू (क्लैफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या के कारण वह अपनी माँ का दूध भी ठीक से नहीं पी पा रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह चिंता और बेबसी का समय था। ऐसे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चिरायु टीम उनके लिए उम्मीद बनकर सामने आई और आज उसी बच्चे के चेहरे पर सामान्य मुस्कान लौट आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है।

    लगभग छह माह पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत में जन्मे इस बच्चे को जन्मजात विकृति के कारण स्तनपान करने में कठिनाई हो रही थी। आरबीएसके टीम ने बच्चे और उसके माता-पिता से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें इस बीमारी के उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। करीब छह महीनों तक टीम द्वारा बच्चे का नियमित फॉलो-अप लिया गया। इस दौरान उसके वजन, ऊँचाई और सामान्य स्वास्थ्य की जांच की जाती रही तथा आवश्यक दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गईं। टीम ने परिवार को भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे का उपचार संभव है। बाद में आरबीएसके टीम के सहयोग से स्माइल ट्रेन संस्था के माध्यम से बिलासपुर के लाडिगर अस्पताल में बच्चे का ऑपरेशन कराया गया, जो सफल रहा। ऑपरेशन के बाद बच्चा स्वस्थ है और परिवार अपने बच्चे को सामान्य रूप से देखकर बेहद खुश है।

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ियों, मदरसों और छात्रावासों में जाकर 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। प्रत्येक बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाया जाता है, जिसमें उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी दर्ज रहती है। कार्यक्रम के अंतर्गत सामान्य बीमारियों के लिए दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि जटिल बीमारियों वाले बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर उपचार कराया जाता है। इसके लिए चिरायु वाहन की सुविधा भी उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014 से संचालित यह कार्यक्रम “चिरायु” नाम से भी जाना जाता है। यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार ने राहत की सांस ली है। माता-पिता का कहना है कि यदि समय पर चिरायु टीम का सहयोग नहीं मिलता तो उनके लिए इलाज कराना संभव नहीं था। आज उनके बच्चे के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
 

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