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विदेश

Fuel Crisis in Asia: कई देशों में वर्क फ्रॉम होम और स्कूल बंद, जानें पड़ोसी मुल्कों की स्थिति

ईरान
ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमले के बाद मध्य-पूर्व में छिड़े संघर्ष और तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत समेत सभी एशियाई देशों ने ऊर्जा बचाने और आर्थिक असर को कम करने के लिए कई आपात कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एशिया अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 60% मध्य-पूर्व से आयात करता है, इसलिए ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर इस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ता है।

इंधन संकट को देखते हुए भारत ने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग, रूस से तेल आयात में वृद्धि, और घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश जैसे कड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कड़ी निगरानी कर रही है, वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग तलाश रही है, और खुदरा कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रही है। भारत ने आपात प्रावधानों का उपयोग करते हुए एलपीजी (LPG) को औद्योगिक उपयोग से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ने का भी फैसला किया है, ताकि आम जनता को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। सरकार ने राज्यों को एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए सतर्क रहने और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

पड़ोसी देशों में क्या उपाय किए जा रहे
पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश फिलहाल गंभीर ईंधन संकट (Fuel Crisis) का सामना कर रहा है, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा ईरान युद्ध है। देश की 95% ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर हैं, जो वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के कारण प्रभावित हुई हैं। इस संकट की वजह से बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं क्योंकि सरकार ने ईंधन आपूर्ति सीमित कर दी है। ऊर्जा बचत के लिए कई विश्वविद्यालयों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। संकट के बीच भारत ने "नेबरहुड फर्स्ट" नीति के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की पहली खेप पाइपलाइन के जरिए भेजी है।

पाकिस्तान में स्कूल बंद, सेवाएं ऑनलाइन
पश्चिमी पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी ईंधन संकट के बीच ऊर्जा बचत के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। पाक सरकार ने सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कटौती कर दी है, जबकि दफ्तरों में 4-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है। इसके अलावा 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया गया है। स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद करना, और सरकारी स्तर पर अनावश्यक कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी गई है। पाकिस्तान ने मंत्रियों, सलाहकारों और सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकारी इफ्तार पार्टियों और कार्यक्रमों पर भी पूर्ण पाबंदी लगा दी है।

अन्य एशियाई देशों में क्या कदम?
चीन ने ईंधन संकट से बचने के लिए अपने विशाल स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व (रणनीतिक तेल भंडार) का उपयोग शुरू कर दिया है, जो 100 दिनों से अधिक की जरूरतें पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही, चीन ने क्रूड ऑयल की खरीद बढ़ा दी है और ईंधन निर्यात को अस्थाई रूप से रोक दिया है। चीन ने अगले पांच वर्षों में कार्बन तीव्रता घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाने की योजना तेज कर दी है।
 
विदेश यात्राओं पर रोक
दक्षिण कोरिया ने बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 30 वर्षों में पहली बार ईंधन कीमतों पर सीमा (price cap) लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही वह होर्मुज स्ट्रेट के बाहर अन्य स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। वहीं दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश वियतनाम ने कंपनियों से कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) की सुविधा देने की अपील की है। थाईलैंड ने सरकारी कर्मचारियों को विदेश यात्राएं रोकने और घर से काम करने के निर्देश दिए हैं, जबकि फिलिपीन्स में कुछ सरकारी कार्यालयों में अस्थायी रूप से चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है। साथ ही एयर-कंडीशनिंग का तापमान 24°C से कम न रखने का निर्देश दिया गया है और बैठकों को वर्चुअल तरीके से करने को कहा गया है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहा तो खाद और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है, जिसका सबसे अधिक असर एशिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा संकट लंबा खिंचने पर एशिया की अर्थव्यवस्थाओं और आम जनता दोनों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

 

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