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विदेश

ईरान संग जंग के माहौल में सऊदी दौरा: मदद की तलाश में शहबाज शरीफ

इस्लामाबाद
पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता की बातें करता है। अब जबकि ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमले किए हैं तो इस संघर्ष में सऊदी अरब भी अमेरिकी पाले में है। ऐसे हालात में पाकिस्तान ने इस्लामिक एकता की कोई दुहाई नहीं दी है और सीधे तौर पर सऊदी अरब के साथ दिख रहा है। यहां उसने ना तो सऊदी अरब को इस्लामिक एकता की सीख दी और ना ही ईरान से समझौते की अपील की। उसने सीधे तौर पर सऊदी अरब का साथ दिया है और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ खुद ही इस्लामिक मुल्क पहुंच गए हैं। इससे पहले पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा चिंता पर बात की थी।

उसके इस रुख को लेकर माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने सिर्फ अपने कर्ज के हित को देखते हुए सऊदी अरब का साथ दिया है। इसके अलावा शिया और सुन्नी वाला विवाद भी अहम है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि वह शिया मुल्क ईरान के साथ बहुत ज्यादा दिखे, जबकि सुन्नी देश सऊदी अरब के साथ रहना आंतरिक राजनीति में भी फायदा देगा। फिर सऊदी अरब से मोटा कर्ज पाकिस्तान को मिलता रहा है और बदहाली के दौर में ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी भी उसे मिलती रही है। बदले में पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों की धौंस दिखाते हुए सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी देने के प्रयास किए हैं। बीते साल दोनों देशों का एक डिफेंस समझौता भी हुआ था।

इसमें सऊदी अरब और पाकिस्तान ने तय किया था कि किसी एक मुल्क पर हमला दोनों पर माना जाएगा और मिलकर लड़ेंगे। अब मुश्किल यह है कि सऊदी अरब पर वह ईरान हमले कर रहा है, जो खुद एक इस्लामिक देश है। पाकिस्तान के लिए मुसीबत यह है कि फंड उसे सऊदी अरब से मिलता है, जबकि पड़ोस में ईरान है। यदि पाकिस्तान ने सऊदी अरब से ज्यादा नजदीकी बढ़ाई तो फिर बलूचिस्तान में ईरान भी मुश्किलें बढ़ा सकता है। बलूचिस्तान एक सांस्कृतिक इकाई है, जिसका एक बड़ा हिस्सा ईरान में भी लगता है। ऐसे में यहां के पेच हमेशा उसके पास रहे हैं और वह कभी भी पाकिस्तान की परेशानी बढ़ा सकता है।

पाक पीएम के प्रवक्ता ने कहा- हम सऊदी अरब के साथ
बता दें कि एक दिन पहले ही पाकिस्तानी पीएम के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा था कि सऊदी अरब को जहां भी जरूरत होगी, हम खड़े मिलेंगे। इस बीच शहबाज शरीफ खुद ही सऊदी अरब निकले हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि वह मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर पहुंचे हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय अशांति, अस्थिरता और ईरान के रुख को लेकर बात हो सकती है। शहबाज शरीफ सिर्फ एक दिन की विजिट पर ही सऊदी अरब पहुंचे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि शायद कोई अहम बात करने के लिए वह निकले हैं।

 

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