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मध्यप्रदेश

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप दे

भोपाल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप में किया जाना चाहिए। कार्य का दृष्टिकोण मानवतावादी हो। भाव संवेदनशील और विचारशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रयासों में सकारात्मक सोच के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम बंदियों की सोच को रचनात्मक दिशा देने। भविष्य के प्रति विश्वास और आत्मबल को मजबूत करने में बहुत सहयोगी होगा।

राज्यपाल पटेल सोमवार को लोकभवन में गृह एवं जेल विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विशेष महानिदेशक जेल अखितो सेमा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

राज्यपाल पटेल ने अधिकारियों से कहा कि बंदी उत्पादक गतिविधियों के द्वारा बंदियों के परिवारों के जीवन निर्वाह में आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से नियोजन गतिविधियों का संयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद मामूली अपराधों के विचाराधीन कैदियों को केवल दंड देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सकारात्मक सुधार के जरिए समाज की मुख्य धारा में वापस भेजना पुनर्वास प्रयासों का मूलाधार होना चाहिए। भाव उनको अपराधी की पहचान से मुक्त होकर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित होने में मदद का होना चाहिए। समाज के नव-निर्माण में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों को देश की प्रगति और प्रेरक कहानियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके जीवन में आशावाद और नव-निर्माण का संचार होगा। बंदियों के भीतर छिपी नकारात्मकता में कमी आएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-सुधार की भावना जागृत होगी। उन्होंने जेलों में लंबित दया याचिकाओं, महिला बंदियों के बच्चों के उचित लालन-पालन की व्यवस्थाओं, महिला बंदियों के पुनर्वास, दिव्यांग एवं बुजुर्ग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और श्रम शक्ति के उत्पादक गतिविधियों में नियोजन के संबंध चर्चा की।

अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। जेल विभाग द्वारा विगत पांच वर्षों में प्राप्त सभी दया याचिकाओं का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके त्वरित निराकरण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 180 देशों के 11 लाख लोगों के द्वारा देखे जाने वाले गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में प्रसारण की अभिनव पहल जेल विभाग द्वारा की गई है। साप्ताहिक प्रसारण में गीता के श्लोक का शुद्ध उच्चारण और श्लोक का भावार्थ कर समझाया जाता है।

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