<?php /** * The template for displaying the header * */ defined( 'ABSPATH' ) || exit; // Exit if accessed directly ?><!DOCTYPE html> <html <?php language_attributes(); ?>> <head> <meta charset="<?php bloginfo( 'charset' ); ?>" /> <link rel="profile" href="http://gmpg.org/xfn/11" /> <?php wp_head(); ?> </head> <body id="tie-body" <?php body_class(); ?>> <?php wp_body_open(); ?> <div class="background-overlay"> <div id="tie-container" class="site tie-container"> <?php do_action( 'TieLabs/before_wrapper' ); ?> <div id="tie-wrapper"> <?php TIELABS_HELPER::get_template_part( 'templates/header/load' ); do_action( 'TieLabs/before_main_content' );
देश

नया हथियार ‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल, रेंज 700 KM, आयरन डोम और अन्य डिफेंस सिस्टम भी हैं दुविधा में

बेंगलुरु 

 21वीं सदी का युद्ध 20वीं सदी के मुकाबले काफी बदल चुका है. अब दुश्‍मन की सरजमीन पर कदम रखे बिना उसे मिट्टी में मिलाया जा सकता है. लॉन्‍ग रेंज मिसाइल किसी भी देश में तबाही लाने में सक्षम है. इसके अलावा स्‍टील्‍थ यानी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान मॉडर्न रडार सिस्‍टम को धोखा देकर टार्गेट को खत्‍म कर सकता है. अमेरिका के स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर ने ईरान में जमकर तबाही मचाई थी, पर तेहरान का रडार सिस्‍टम उसे कैच नहीं कर सका था. इसे देखते हुए तमाम पावरफुल देश टेक्‍नोलॉजिकली एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रहा है, ताकि किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से निपटा जा सके. अब जरा सोचिए स्‍टील्‍थ फाइटर जेट के साथ ‘स्‍टील्‍थ’ लॉन्‍ग रेंज क्रूज मिसाइल को पेयर किया जाए तो फिर क्‍या होगा? भारत इसी प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है.

भारत ने पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके तहत रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देने वाला स्‍टील्‍थ फाइटर जेट डेवलप किया जा रहा है. साल 2030 के बाद पांचवीं पीढ़ी का देसी लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है. अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्‍टील्‍थ ऑप्‍टीमाइज्‍ड लॉन्‍ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) डेवलप करने में जुटा है. इस क्रूज मिसाइल को AMCA के तहत डेवलप किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. 600 से 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह मिसाइल S-400, THAAD, आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा दे सकती है.

भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कॉम्पैक्ट और स्टील्थ-ऑप्टिमाइज्ड क्रूज मिसाइल विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट का उद्देश्य केवल किसी मौजूदा हथियार को नए विमान से जोड़ना नहीं, बल्कि AMCA की स्टील्थ क्षमता को बरकरार रखते हुए उसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम बनाना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की स्वदेशी सैन्य तकनीक को नई ऊंचाई देने के साथ भविष्य के हवाई युद्ध में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित कर सकती है. यह मिसाइल विशेष रूप से AMCA के आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे) में फिट होने के लिए तैयार की जा रही है, जिससे विमान की रडार से बचने की क्षमता प्रभावित न हो.

स्‍टील्‍थ क्रूज मिसाइल इतना खास क्‍यों?

    मिसाइल का वेट: 1000 किलोग्राम (संभावित)
    मिसाइल का रेंज: 600 से 700 किलोमीटर
    मिसाइल वर्जन: एयर टू लैंड अटैक
    AMCA के लिए खासतौर पर किया जाएगा डेवलप
    आकार में छोटा, पर बेहतरीन होगी टेक्‍नोलॉजी

स्टील्थ डिजाइन और वेपन सिस्‍टम

AMCA Aeronautical Development Agency (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह शुरू से ही स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी पर आधारित है. इसमें इंटरनल वेपन बे की व्यवस्था है, जिससे बाहरी यानी आउटर पायलन पर हथियार फिट की जरूरत नहीं पड़ती और विमान की रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम रहती है. इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए विमान का पता लगाना कठिन हो जाता है. रडार क्रॉस सेक्‍शन कम होने की वजह से उन्‍नत रडार के साथा ही S-400, THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए भी इस मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर पाना कठिन होगा. लंबी दूरी की पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलें आकार और वजन में बड़ी होती हैं, जिससे उन्हें इंटरनल बे में रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. मौजूदा लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का वजन लगभग 1500 किलोग्राम या उससे अधिक होता है, जो AMCA के डिजाइन और वेपन इंटीग्रेशन में बाधा पैदा कर सकता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए DRDO एक छोटे आकार की नई मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसका वजन लगभग 1000 किलोग्राम रखने का लक्ष्य है. हल्के वजन के कारण AMCA अपने प्रत्येक इंटरनल वेपन बे में दो मिसाइल तक ले जा सकेगा. साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी साथ रखने की क्षमता बनाए रखेगा.

600 से 700 किलोमीटर रेंज

नई कॉम्पैक्ट क्रूज मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 600 से 700 किलोमीटर तक होगी. भले ही यह दूरी पारंपरिक लंबी दूरी की मिसाइलों से कम हो, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह थिएटर लेवल के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. इस मिसाइल का उपयोग दुश्मन के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली और लॉजिस्टिक ठिकानों जैसे हाई वैल्‍यू के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए किया जा सकेगा. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह रेंज AMCA के लगभग 1500 किलोमीटर के कॉम्बैट रेडियस के साथ संतुलन बनाती है, जिससे विमान बिना दुश्मन की सीमा में गहराई तक प्रवेश किए भी प्रभावी हमला कर सकेगा.
कम रडार सिग्नेचर

इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्टील्थ सेंट्रिक डिजाइन होगा. इसमें रडार पर कम दिखाई देने वाली संरचना, उन्नत कंपोजिट सामग्री और विशेष आकार का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लॉन्च के दौरान भी विमान की स्टील्थ क्षमता प्रभावित न हो. वेपन बे खुलने के दौरान भी मिनिमम रडार सिग्नेचर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके अलावा मिसाइल में स्वदेशी छोटे टर्बोफैन इंजन तकनीक, अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता जैसे फीचर शामिल होने की संभावना है. यह तकनीक दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक लक्ष्य भेदन सुनिश्चित करेगी.
स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा

यह परियोजना फिलहाल कॉन्‍सेप्‍ट और डिजाइन चरण में है, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट है. 2030 के दशक के मध्य तक AMCA को पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली से लैस करना. इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि AMCA और नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल का यह संयोजन भारत की वायु शक्ति को नई रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगा. यह न केवल देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा तकनीक की प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगा. कुल मिलाकर DRDO का यह प्रयास भारत की सैन्य तकनीकी प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्र में घातक क्षमता और स्‍टील्‍थ क्षमता दोनों को संतुलित करने की रणनीति को दर्शाता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button