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मध्यप्रदेश

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प

आर्थिक समीक्षा में अभ्युदय मध्य प्रदेश का विकसित भारत संकल्प 

लेखक सत्येंद्र जैन,आर्थिक चिंतक।

मध्यप्रदेश की विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु आर्थिक समीक्षा उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत की गयी है।आर्थिक समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों, कार्यक्रमों का समावेश किया गया है।इन दूरदर्शी आर्थिक नीतियों द्वारा संतुलित और समावेशी विकास का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।डॉ मोहन यादव के अभ्युदय मध्यप्रदेश का उदय हो रहा है। भारत के भागीरथी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल एवं योग्य मार्गदर्शन में भारत को विश्व की सबसे सशक्त अर्थव्यवस्था निर्मित करने हेतु मध्यप्रदेश सर्वस्व अर्पण के भाव से योगदान दे रहा है।यही कारण है कि मप्र का भारत की जीडीपी में योगदान लगभग 3.25 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 5.8 प्रतिशत हो गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने आर्थिक समृद्धि के अनेक कदम उठाये हैं।इसके सुखद परिणाम मिलना आरंभ हो गये हैं।

वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रूपये अनुमानित है।पिछले वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर भाव वर्ष 2011-12 के सापेक्ष जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रूपये अनुमानित है,।जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं,अपितु वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में प्रचलित भाव पर 38,497 रूपये रही प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,69,050 रूपये हो गई है। यह आय स्तर में सुधार का परिचायक है, जो जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।वर्ष 2025-26 में प्रचलित भाव पर सकल राज्य मूल्य वर्धन जीएसवीए में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र का 19.79 प्रतिशत तथा तृतीयक क्षेत्र का 37.12 प्रतिशत रहा। इससे प्रकट होता है कि कृषि आधारित आधार को मजबूती देते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग और सेवा क्षेत्रों में भी संतुलित विस्तार हुआ है।

प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रूपये रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रूपये की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इस क्षेत्र में फसलें 30.17 प्रतिशत भागीदारी के साथ प्रमुख घटक रहीं। पशुधन, वानिकी, खनन एवं उत्खनन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर वर्ष 2024-25 में कुल फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। उद्यानिकी क्षेत्रफल 28.39 लाख हेक्टेयर रहा है।दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुँचा है। गांवों की समृद्धि के लिए 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण तथा 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के निर्मित होने से ग्रामीण आधार सशक्त हुआ है।

द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन- GSVA वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रूपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्माण, विनिर्माण तथा विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाओं का प्रमुख योगदान है। औद्योगिक विकास के अंतर्गत 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही।

तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल GSVA 5,85,588 करोड़ रूपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। व्यापार, मरम्मत, होटल एवं रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, लोक प्रशासन तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख योगदान रहा है। पर्यटन क्षेत्र में 13.18 करोड़ पर्यटकों के आगमन से पर्यटन क्षेत्र में तीव्रता आई है। वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रूपये राजस्व आधिक्य, अनुमानित कर राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि तथा ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत का होना मध्यप्रदेश के वित्तीय अनुशासन में निरंतर सुधार को प्रकट करता है। नगरीय विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के अंतर्गत 8.75 लाख आवास पूर्ण हुए तथा स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में राज्य को 8 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में कुल व्यय 34,112 करोड़ रुपये रहा।यह GSDP का 3 प्रतिशत है। नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए और वर्ष 2001-03 के सापेक्ष मातृ मृत्यु दर 379 से घटकर वर्ष 2021-23 में 142 प्रति लाख हो गई।

शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल बजट का 10.37 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट दर शून्य रही और कक्षा 6-8 में यह घटकर 6.3 प्रतिशत रह गई। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई है।

महाराजा विक्रमादित्य की भाँति कुशल प्रशासक ,मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अखंड प्रचण्ड पुरुषार्थ करते हुए अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रहे हैं। महानतम अर्थशास्त्री चाणक्य के अनुसार- तस्मान्नित्योत्थितो राजा कुर्यादर्थानुशासनम् ।

अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः ।

अर्थात राजा प्रतिदिन उद्यमशील होकर शासन करे । अर्थ अनुशासन करे।अर्थ मूल को संवर्धित करे। चाणक्य के इस मंत्र को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अभ्युदय मध्य प्रदेश की रचना कर रहे हैं।अभ्युदय मध्य प्रदेश के सर्वागीण विकास द्वारा विकसित  भारत 2047 का संकल्प स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो रहा है, झलक रहा है।

इति श्री।

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