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उत्तर प्रदेश

न कर्फ्यू है, न दंगा है बल्कि यूपी में सब चंगा हैः मुख्यमंत्री योगी

 

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान रखे विचार  

राज्यपाल के प्रति अभद्र व्यवहार को लेकर विपक्ष पर किया करारा प्रहार

सीएम बोले, आज प्रदेश कर्फ्यू कल्चर से कानून के राज और अविश्वास से आत्मविश्वास तक पहुंचा

डबल इंजन सरकार की नीति से यूपी बना निवेश, नवाचार और पारदर्शिता का मॉडल

– प्रयागराज में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी सुरक्षा और सुशासन पर बढ़े विश्वास का प्रमाण

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर सोमवार को विधान परिषद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सदन में राज्यपाल के प्रति अभद्र और अशिष्ट व्यवहार करने पर विपक्ष को जमकर लताड़ लगाई। साथ ही प्रभावी कानून व्यवस्था को लेकर कहा कि न कर्फ्यू है, न दंगा है, बल्कि यूपी में सब चंगा है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल प्रदेश का संवैधानिक प्रमुख होता है। इसके बावजूद राज्यपाल पर प्रतिपक्ष द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। यह न केवल लोकतंत्र को कमज़ोर करता है बल्कि संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े सभी प्रमुख हस्तियों की अवमानना के भी दायरे में आता है। यह हम सबका दायित्व बनता है कि हम अपने राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करें। साथ ही संविधान की व्यवस्था के तहत संवैधानिक प्रमुखों के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखें। उनके प्रति कोई ऐसा आचरण न करें, जो आचरण देश की भावी पीढ़ी को गलत दिशा की ओर अग्रसर करे, लेकिन प्रतिपक्ष से इसकी अपेक्षा करना व्यर्थ है।

प्रदेश की जनता को पहले ही मिलना चाहिये था कानून का राज
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राज्यपाल एक अनुभवी राजनेता होने के साथ आज प्रदेश सरकार की संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपना मार्गदर्शन और नेतृत्व सभी को प्रदान कर रही हैं। उनके प्रति अभद्र व्यवहार समाजवादी पार्टी की वास्तविक सोच और प्रतिपक्ष की नकारात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। पिछले नौ वर्ष में प्रदेश ने एक अपनी यात्रा तय की है। यह यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन, कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव की यात्रा, समस्या से समाधान और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। इस यात्रा को देश और दुनिया स्वीकार करती है। वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बदलाव आया है। यह अधिकार प्रदेश की 25 करोड़ जनता को पहले ही मिलना चाहिये था लेकिन अपने संकुचित एजेंडे को लेकर चलने वाली सरकारों ने प्रदेश के भविष्य और जनता जनार्दन के साथ खिलवाड़ किया। उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया। प्रदेश को अराजकता, अव्यवस्था, अपराध का एक गढ़ बना दिया। इस दौरान कर्फ्यू यहां की पहचान बन गई थी। उत्तर प्रदेश को भारत के शाश्वत मूल्यों की आधारभूमि माना जाता है, उसमें किस प्रकार की अव्यवस्था थी, यह हम सबने देखा है। वहीं डबल इंजन सरकार की स्पष्ट नीति, साफ़ नीयत, सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता से आज उत्तर प्रदेश ने बॉटलनेक से देश की अर्थव्यवस्था का ब्रेकथॉट बनाने में सफलता प्राप्त की है।

दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यूपी रेवन्यू सरप्लस और उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी यात्रा को लेकर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दुनिया के सबसे बड़े एआई इंपेक्ट समिट का उद्घाटन किया है। यह पांच दिनों तक देश और दुनिया के 18 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में चलेगा। इस समय जब दुनिया तेजी से इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रही है, तब भारत भी इस दिशा में मजबूत और दूरदर्शी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। देश न केवल वर्तमान बल्कि भावी पीढ़ी के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन योजना के साथ कार्य कर रहा है। इसी राष्ट्रीय सोच के अनुरूप उत्तर प्रदेश ने भी पिछले साढ़े आठ से पौने नौ वर्षों में खुद को परिवर्तन की आधारभूमि के रूप में स्थापित किया है। प्रदेश में आए इस व्यापक बदलाव को “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की त्रिवेणी के रूप में देखा जा रहा है। आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के सामने टेक्नोलॉजी, भरोसे और परिवर्तन के समन्वित मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यह त्रिवेणी केवल एक नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली और विकास की दिशा का प्रतीक बन चुकी है। उत्तर प्रदेश की ही धरती पर प्रयागराज स्थित है जिसकी पहचान मां गंगा, यमुना और  सरस्वती की पावन त्रिवेणी से है। उसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीक को आधुनिक संदर्भ में नया रूप देते हुए उत्तर प्रदेश ने “टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन” की नई त्रिवेणी को विकास के केंद्र में स्थापित किया है। यह नई त्रिवेणी प्रदेश की प्रगति, पारदर्शिता और जनविश्वास की आधारशिला बन चुकी है।

नीतिगत उदासीनता और विकास विरोधी सोच के माहौल को हमने बदला
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में नीतिगत उदासीनता, प्रशासनिक शिथिलता और विकास विरोधी सोच का जो माहौल था, उसे बीते वर्षों में पूरी तरह बदलने का प्रयास किया गया। अनुशासन, निर्णायक नेतृत्व, स्पष्ट नीति और शुद्ध नीयत के माध्यम से शासन-प्रशासन को एक नई दिशा देने का कार्य किया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार के कार्यों का प्रभाव भी प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लेकर रोजगार सृजन के व्यापक अभियानों तक, हर क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से कार्य हुआ है। उत्तर प्रदेश को एक बेहतरीन इंवेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, जिससे प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश का वातावरण सुदृढ़ हुआ है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के विभिन्न माध्यमों से प्रदेश को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रही है।

पहले “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने प्रदेश को झकझोर रखा था
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चलाते थे। गुंडा टैक्स और अवैध वसूली प्रदेश की नियति बन चुकी थी। “वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया” जैसी स्थिति ने उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। कानून चंद हाथों की जागीर बन गया था और कर्फ्यू व दंगे आम बात हो गई थी। पर्व और त्योहार आस्था के बजाय आशंका के केंद्र बन जाते थे। पुलिस का मनोबल टूटा हुआ था। न बेटियां सुरक्षित थीं और न व्यापारी। उस दौर में प्रदेश की छवि अराजकता और अस्थिरता के पर्याय के रूप में देखी जाती थी। वहीं वर्ष 2017 के बाद यही उपद्रवग्रस्त उत्तर प्रदेश आज उत्सव प्रदेश में बदल चुका है। अब राज्य में कानून का राज स्थापित हुआ है। विकास की पहली शर्त ‘रूल ऑफ लॉ’ है और इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने मजबूती से काम किया। रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया और युवाओं के लिए नई-नई योजनाएं शुरू की गईं। मॉडर्न पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर और फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी विशेष कार्य किया गया। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से उत्तर प्रदेश अब “फियर जोन” से “फेथ जोन” में परिवर्तित हो गया है। अब यहां भय का नहीं बल्कि आस्था का वातावरण है। लोग सुरक्षा और व्यवस्था पर विश्वास के साथ प्रदेश में आ रहे हैं। “कर्फ्यू कल्चर” की जगह “जीरो टॉलरेंस कल्चर” ने नई पहचान दी है। दंगों की जगह अब फेस्टिव और टेंपल टेक्नोलॉजी इकोनॉमी तेजी से विकसित हो रही है। जो प्रदेश पहले दंगों और अव्यवस्था के कारण भय की स्थिति में था, वहां अब उत्सव और आस्था का वातावरण दिखाई देता है।

वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकुम्भ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन हुआ। प्रयागराज में माघ मेला भी संपन्न हुआ। पहले माघ मेले में मुख्य रूप से कल्पवासी आते थे, जो पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक एक महीने के लिए प्रवास करते थे और श्रद्धालुओं की संख्या कुछ लाख तक सीमित रहती थी, लेकिन इस बार माघ मेले में 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाई। महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रयागराज में 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया। श्रद्धालुओं की यह अभूतपूर्व भागीदारी केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि व्यवस्था और सुरक्षा के प्रति उनके विश्वास का भी प्रमाण है। भारत की आत्मा उत्तर प्रदेश में निवास करती है। यहां अयोध्या की मर्यादा, काशी की शाश्वत चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की समरसता त्रिवेणी, कुम्भ और महाकुम्भ जैसे आयोजनों में स्पष्ट दिखाई देती है। इन आयोजनों ने प्रदेश की नई पहचान को सुदृढ़ किया है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ। अब हम कह सकते हैं कि उत्तर प्रदेश में न कर्फ्यू है, न दंगा है, बल्कि “यूपी में सब चंगा है।”

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