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देश

बांका में मार्केट वैल्यू रेट का रिवीजन से जमीन रजिस्ट्री होगी महंगी

बांका.

नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री में नया मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू हो जाएगा। इसके लिए जिला मूल्यांकन समिति की ओर से बांका नगर परिषद, बौंसी नगर पंचायत, अमरपुर नगर पंचायत और कटोरिया नगर पंचायत सहित सभी राजस्व ग्रामों में इलाके वार एमवीआर रेट के रिविजन की पूरी तैयारी कर ली गई है। साथ ही इससे संबंधित प्रस्ताव भी विभाग के पास भेज दिया गया है।

विभागीय स्वीकृति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जिससे रजिस्ट्री दर चार से पांच गुणा तक बढ़ जाएगा। शहर के आसपास के इलाकों का भी शहरी क्षेत्र के अनुसार दर निर्धारित किया जा रहा है। अभी जो दर है उसमें एमवीआर और बाजार दर में काफी अंतर है। जमीन की रजिस्ट्री का रेट सबसे अधिक बांका नगर परिषद क्षेत्र में बढ़ेगा। शहर के गांधी चौक के पास अभी प्रति डिसमल साढ़े छह लाख रुपए एमवीआर है, लेकिन अप्रैल से गांधी चौक के पास की जमीन का एमवीआर 25 लाख रुपए प्रति डिसमल तक हो जाएगा। इसी तरह कटोरिया और चांदन में खेतिहर जमीन का एमवीआर प्रति डिसमल दो से चार हजार रुपए डिसमल है, जो बढ़कर 15 से 20 हजार रुपए प्रति डिसमल तक पहुंच जाएगा। जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है।

मार्केट रेट और एमवीआर में काफी अंतर
जिला सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि अभी जो एमवीआर है, वह बाजार दर से काफी कम है। जमीन के साथ-साथ भवन और संरचना में भी यही स्थिति है। व्यावसायिक भूखंड में पक्के निर्माण का मूल्य हाइवे और मुख्य मार्ग के किनारे तीन हजार रुपए प्रति वर्गफीट निर्धारित है, जबकि आवासीय भवन के लिए एमवीआर 1650 रुपए प्रति वर्गफुट है, लेकिन बाजार मूल्य तीन से चार गुणा से भी अधिक है। आरसीसी रोड के किनारे व्यावसायिक भूखंड में पक्का निर्माण का मूल्य 2600 रुपए प्रति वर्गफुट है जबकि आवासीय उपयोग वाली संरचना का दर औसतन 1200 रुपए प्रति वर्गफीट है। जिला सब रिजिस्टार ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष में 50 फीसद तक एमवीआर में बढ़ोतरी हो जाएगी।

2013 के बाद हो रहा एमवीआर पुनरीक्षण
एमवीआर का पुनरीक्षण करीब 13 साल बाद हो रहा है। पिछली बार साल 2013 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का किया गया था। इसके तीन साल बाद 2016 में केवल बांका शहरी क्षेत्र के लिए एमवीआर पुनरीक्षण किया गया था। ऐसे में करीब एक दशक से अधिक समय से एमवीआर पुनरीक्षण नहीं होने के कारण राजस्व संग्रहण कार्य एवं आधारभूत संरचना विकास कार्य में परेशानी हो रही थी। साथ ही जिले में अब जमीन की वर्गीकरण प्रक्रिया में भी बदलाव होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन का वर्गीकरण आवासीय भूमि, कृषि भूमि तथा सड़क की दोनों तरफ की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि तथा व्यावसायिक, औद्योगिक एवं विशेष श्रेणी क्षेत्र के रूप में किया गया है। यानी ग्रामीण क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण सात प्रकार में किया गया है, जबकि शहरी क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण छह तरह से किया गया है

नए साल में बढ़ेगा राजस्व
एमवीआर रिवाइज होने से सरकार को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। अभी जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है। एमवीआर पुनरीक्षण होने से जमीन का वैल्यू बढ़ेगा। इससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। शहरी क्षेत्र और सभी राजस्व ग्रामों के लिए इलाके वार एमवीआर रेट में संशोधन की तैयारियां पूरी कर ली गई है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद डीएम से आदेश लेकर इसे लागू कर दिया जाएगा। – हेमंत कुमार, जिला अवर निबंधक पदाधिकारी

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