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देश

ट्रंप के दावे के बाद सवालों में भारत-रूस दोस्ती, क्या जारी रहेगी रूसी तेल की खरीद?

नई दिल्ली
7 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तो तैयार हो गई। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उस कार्यकारी आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। हालांकि, रूसी तेल को लेकर स्थिति अब भी कूटनीतिक रहस्यों में लिपटी हुई है।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए कार्यकारी आदेश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि अमेरिकी वाणिज्य सचिव को पता चलता है कि भारत ने दोबारा रूसी तेल खरीदना शुरू किया है तो 25% का दंडात्मक शुल्क दोबारा लगाया जा सकता है।

भारत का क्या है रुख?
ट्रंप के इस बड़े दावे पर भारत सरकार की ओर से शनिवार को कोई सीधा खंडन या पुष्टि नहीं आई है। जब अधिकारियों से ट्रंप के इस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के गुरुवार के बयान का हवाला दिया। भारत के द्वारा कहा गया है कि, "1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बदलते बाजार को देखते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर किसी दबाव में झुकने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता, भले ही हालिया हफ्तों में रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई हो।

तेल पर सस्पेंस के बावजूद, भारतीय निर्यातकों के लिए यह समझौता संजीवनी जैसा है। भारतीय सामानों पर प्रभावी शुल्क 50% से घटकर 18% पर आ जाएगा। कपड़ा, रत्न-आभूषण, फार्मा और विमानन पुर्जों पर से अतिरिक्त शुल्क हटा लिए गए हैं। बदले में भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों (बादाम, अखरोट, सोयाबीन तेल) और औद्योगिक सामानों पर टैरिफ कम करने के साथ ही अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर की खरीदारी के लिए सहमत हुआ है।
क्या भारत रूस को छोड़ देगा?

आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद और अमेरिका से LNG आयात बढ़ाने के विकल्प खुले रखे हैं। रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें भारत की ओर से तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं।

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