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विदेश

टैरिफ डील का बड़ा खुलासा: क्या किसानों को सच में मिला फायदा?

वाशिंगटन
अमेरिका के साथ सोमवार को घोषित व्यापार समझौते को लेकर कयासों का बाजार गरम है। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। इस बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। गौरतलब है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं।

किसानों के हितों से समझौता नहीं
दरअसल, भारत द्वारा अपने राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्र को अमेरिका की अधिक पहुंच के लिए खोलने से इनकार करना मुक्त व्यापार समझौते के दौरान वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एक प्रमुख विवाद का मुद्दा रहा है। नई दिल्ली सोयाबीन और डेयरी जैसे कृषि क्षेत्रों को खोलने के लिए अनिच्छुक रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को, जिन्हें अब तक संरक्षित रखा गया है, आगे भी संरक्षित रखा जाएगा। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारत ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की पेशकश की है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों के लिए चुनिंदा बाजारों तक पहुंच की पेशकश की है।

प्रतिबंध-मुक्त तेल खरीदेगी सरकार
वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत प्रतिबंध-मुक्त दुनिया भर के देशों से कच्चे तेल की खरीद को दर के आधार पर जारी रखेगा। सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के दौरान हमने वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदी थी। अब प्रतिबंध हट गए हैं, इसलिए हम खरीदेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी।

बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर अपना टैरिफ मौजूदा स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इसके बदले में नई दिल्ली रूस से तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो जाएगी।

500 अरब डॉलर के व्यापार
ट्रंप ने यह भी कहा कि व्यापार समझौते के तहत भारत ने कई उपायों पर सहमति जताई है, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' तक कम करना तथा ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर की व्यापार प्रतिबद्धता की शर्तों में विमान सौदों और अन्य संबंधित निवेशों को शामिल किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि नया व्यापार समझौता भारत के लिए अपार आर्थिक लाभ के द्वार खोलेगा।

भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 46.08 अरब डॉलर रहा। इससे पहले एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता में फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, रक्षा, पेट्रोलियम और विमान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रक्रिया कई वर्षों में पूरी की जाएगी।

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