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राजनीति

भारत-US ट्रेड डील पर शशि थरूर का तंज: सफलता का जश्न बाद में, पहले देश को पूरी सच्चाई

नई दिल्ली
मंगलवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार से स्पष्टता की मांग की। थरूर ने कहा कि भले ही भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ (शुल्क) को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसद करना सकारात्मक हो सकता है, लेकिन सरकार को इसके सभी पहलुओं और विवरणों को सार्वजनिक करना चाहिए। थरूर ने कहा कि वे इस डील को लेकर जश्न मनाना चाहेंगे लेकिन पहले सरकार बताए तो कि मसला क्या है?

शशि थरूर की मुख्य आपत्तियां
एएनआई से बात करते हुए थरूर ने सरकार की कार्यशैली और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- हमारे पास राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट हैं; क्या संसदीय लोकतंत्र में इतना ही काफी है? क्या भारत सरकार को देश की जनता को यह नहीं समझाना चाहिए कि इस सौदे में वास्तव में क्या है?

उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर समझौते के प्रभाव को लेकर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि यदि अमेरिका भारत को अपने कृषि उत्पादों का बड़ा बाजार बनाना चाहता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अमेरिका 500 अरब डॉलर के व्यापार की बात कर रहा है, जबकि भारत का कुल आयात बिल लगभग 700 अरब डॉलर है, तो क्या भारत को अन्य देशों से आयात कम करना पड़ेगा। थरूर ने कहा- विपक्ष सिर्फ इतना जानना चाहता है कि इस समझौते में है क्या। अगर यह अच्छी खबर है तो हम खुशी-खुशी इसका स्वागत करेंगे, लेकिन सरकार को देश को बताना चाहिए कि इसमें कौन-सी शर्तें शामिल हैं।

कांग्रेस पार्टी के तीखे सवाल
कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर कर सरकार से कई कड़े सवाल पूछे हैं-

घोषणा का तरीका: कांग्रेस ने आपत्ति जताई कि युद्धविराम की तरह इस व्यापार समझौते की घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई। यह भी कहा गया कि यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर हुआ है।

'जीरो' टैरिफ का डर: ट्रंप के दावे के अनुसार, भारत अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' करने पर सहमत हो गया है। कांग्रेस का मानना है कि इससे भारतीय बाजार पूरी तरह अमेरिका के लिए खुल जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।

रूसी तेल पर पाबंदी: सबसे बड़ा सवाल रूसी तेल को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या मोदी सरकार ने ट्रंप के दावे के अनुसार रूस से मिलने वाले रियायती तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जता दी है?

विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को केवल सोशल मीडिया घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता के सामने इस सौदे का पूरा कच्चा चिट्ठा रखे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा कैसे की जा रही है।

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