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मध्यप्रदेश

शिकायतकर्ता शिक्षक पर गिरी गाज, दो वेतनवृद्धियाँ रोकी

बड़वानी 
 नरेश रायक मिली जानकारी बताया कि जिस शिक्षक ने खुद को “न्याय का योद्धा” बताकर मोर्चा खोला था, वही अब प्रशासन की फाइलों में आरोपी बनकर दर्ज हो चुका है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक-01 बड़वानी में छात्र से मारपीट का आरोप लगाने वाले शिक्षक जगदीश गुजराती अब खुद फर्जी पत्राचार, दबाव बनाने और अधिकारों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं।
कहते हैं — जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही पहले उसमें गिरता है। बड़वानी में यह कहावत अब सरकारी कागज़ों में दर्ज हो चुकी है।

 शिकायत से शुरू हुआ खेल
शिक्षक जगदीश गुजराती ने सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग में शिकायत दर्ज कराई कि 18 जुलाई को कक्षा 9वीं ‘सी’ में अतिथि शिक्षक पंकज गुर्जवार ने छात्रों सहित उनकी पुत्री को लकड़ी के डंडे से पीटा, जिससे हाथ में “फ्रैक्चर” हो गया।
मामला सुर्खियों में आया, पर जब जांच शुरू हुई तो कहानी की परतें खुद ही उखड़ने लगीं।

 जांच में फिसली शिकायत की ज़मीन
सहायक आयुक्त द्वारा गठित जांच दल ने विद्यार्थियों, स्टाफ, तत्कालीन प्राचार्य आर.एस. जाधव सहित सभी पक्षों के बयान लिए। प्रतिवेदन दिनांक 06 नवंबर 2025 में साफ लिखा गया — घटना उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई गई।
रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि हाथ में फ्रैक्चर होता तो छात्रा नियमित रूप से विद्यालय नहीं आती, हाथ में प्लास्टर होता और चिकित्सकीय प्रमाण सामने आते।
यानि शिकायत की नींव ही कमजोर निकली।

 फर्जी आदेश बनवाकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच बंद होते ही शिक्षक जगदीश गुजराती पर सबसे बड़ा आरोप लगा — सहायक आयुक्त के नाम से फर्जी पत्र जारी करवा कर जावक तक कराने का।
सहायक आयुक्त बड़वानी ने पत्र क्रमांक 11755 दिनांक 10 दिसंबर 2025 में साफ लिखा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्रभाव से कूट रचित पत्र क्रमांक 11555 दिनांक 08 दिसंबर 2025 जारी कराया, जिसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया।
यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा प्रशासनिक विश्वासघात है।

 निलंबन की तलवार, नोटिस की चोट
फर्जीवाड़ा सामने आते ही संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग इंदौर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि प्रकरण के आधार पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है और शिक्षक को इंदौर तलब किया गया।
अब शिक्षक की कुर्सी डगमगा रही है और फाइलें तेजी से ऊपर बढ़ रही हैं।

 पर्दे के पीछे संरक्षण का खेल
सूत्र बताते हैं कि जैसे ही कार्रवाई की आहट हुई, कुछ नेता और अफसर शिक्षक के बचाव में मैदान में उतर आए। जिले के एक बीईओ तक इंदौर पहुँच गए।
यानी सवाल उठता है —
क्या नियम सबके लिए समान हैं या सिफारिश से गुनाह धुल जाते हैं?

उत्कृष्ट स्कूल की चमक पर दाग
शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय-01 बड़वानी जिले का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल है, जहाँ प्रवेश परीक्षा से चयन होता है। यहाँ “क्रीमी लेयर” विद्यार्थी आते हैं, इसलिए परिणाम भी चमकदार रहते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि यदि यहाँ के शिक्षक इतने ही काबिल हैं, तो उन्हें सामान्य स्कूलों में भेजकर क्यों नहीं परखा जाता?
कागज़ों की तारीफ और ज़मीन की हकीकत में फर्क साफ दिख रहा है।
 गिरी सज़ा —
 दो वेतनवृद्धियाँ जब्त
सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में शिक्षक जगदीश गुजराती की दो वेतनवृद्धियाँ रोकने का आदेश जारी हो चुका है। यह कार्रवाई फर्जी पत्राचार और विभागीय अनुशासनहीनता के आधार पर की गई।
यह सिर्फ शुरुआत है या अंतिम फैसला — अब सबकी निगाहें प्रशासन पर हैं। 
 अब असली सवाल
क्या शिक्षक कानून से ऊपर हैं?
क्या फर्जी पत्र बनवाना “न्याय” कहलाता है?
क्या संरक्षण से सच्चाई दबाई जा सकती है?
बड़वानी का यह मामला अब सिर्फ स्कूल का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की खुली परीक्षा बन चुका है।

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