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मध्यप्रदेश

एनजीटी सख्त: भोपाल के वेटलैंड पर अवैध कब्जे पर कार्रवाई न होने पर प्रशासन को चेतावनी

 भोपाल
 कलियासोत जलाशय क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा कार्रवाई नहीं की गई, जो चिंताजनक है।

एनजीटी के समक्ष यह मामला कलियासोत जलाशय, केरवा जलाशय और आसपास के ग्रीन बेल्ट, बाटनिकल गार्डन व रीजनल गार्डन की जमीन पर हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने माना कि इन अवैध गतिविधियों से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं जैसे जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में है।

97 अतिक्रमण चिह्नित किए

बीते कुछ वर्षों में इन जीवों का रिहायशी इलाकों में दिखना मानव जीवन के लिए भी जोखिम बनता जा रहा है। एनजीटी ने अपने आदेश में खुलासा किया कि कलियासोत जलाशय क्षेत्र में कुल 97 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी भूमि पर हैं।

इसके अलावा लगभग 150 हेक्टेयर भूमि, जो बाटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित है, उसकी न तो समुचित सीमांकन हुआ और न ही सुरक्षा। वहीं, बिना उपचारित सीवेज जलाशयों प्रवाह अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। कई एसटीपी वर्षों से अधूरे या ट्रायल रन की स्थिति में हैं।
दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश

ट्रिब्यूनल ने कलेक्टर भोपाल और नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत निगरानी में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया गया है कि दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट पेश की जाए। एनजीटी ने यह भी कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
समय सीमा बीतने के बाद भी शुरू नहीं हुए एसपीटी

एनजीटी ने यह भी चिंता जताई कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण बिना उपचारित गंदा पानी जलाशयों में छोड़ा जा रहा है । अधिकरण ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि की रक्षा करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है और अधिकारियों की निष्क्रियता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को

याचिकाकर्ता डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर खान की ओर से प्रस्तुत तर्कों पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिए कि यह आदेश मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव तक पहुंचाया जाए, ताकि तत्काल और ठोस कार्रवाई हो सके।

अधिकरण ने स्पष्ट किया कि वह स्वामित्व विवाद तय नहीं करेगा, बल्कि उसका उद्देश्य केवल जलाशयों से अतिक्रमण हटाकर भोज वेटलैंड की रक्षा करना है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी।

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