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बिज़नेस

देश का बजट अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर: वैश्विक निवेशक कर रहे हैं बारीकी से विश्लेषण

नई दिल्ली
जब दुनिया युद्ध, महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, ऐसे वक्त में भारत का आम बजट सिर्फ घरेलू दस्तावेज नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संदेश बनकर उभर रहा है जिसका असर अमेरिका से ब्रिटेन तक दिखेगा  । IMF  और World Bank   जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं भारत के बजट को इस सवाल से जोड़कर देख रही हैं  क्या भारत वैश्विक मंदी के बीच स्थिरता का इंजन बन पाएगा? वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरें ऊंची हैं, पश्चिम एशिया और यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में युद्ध जारी हैं, जबकि चीन की सुस्ती ने वैश्विक व्यापार को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में भारत का बजट 2026 अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष महत्व हासिल कर चुका है।

 IMF और World Bank का मानना है कि भारत आने वाले वित्त वर्ष में भी 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रख सकता है। यही वजह है कि वैश्विक एजेंसियां भारत के बजट में राजकोषीय घाटा, पूंजीगत खर्च, रक्षा व्यय और सामाजिक योजनाओं पर खास नजर रखे हुए हैं। Reuters और Bloomberg की रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी निवेशक यह देखना चाहते हैं कि भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच कैसे निवेश-अनुकूल माहौल बनाए रखता है। खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और ग्रीन एनर्जी पर बजटीय फोकस को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

World Bank की टिप्पणी
World Bank का कहना है कि यदि भारत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास पर खर्च बढ़ाता है, तो वह न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि वैश्विक विकास को भी सहारा दे सकता है। वहीं IMF ने चेतावनी दी है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए जोखिम बने रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, अब भारत का बजट सिर्फ देश के लिए नहीं, बल्कि एशिया, अफ्रीका और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। अगर भारत संतुलित बजट पेश करता है, तो यह संदेश जाएगा कि वैश्विक संकट के दौर में भी लोकतांत्रिक और विकासशील अर्थव्यवस्था स्थिर रह सकती है।

अमेरिका पर क्या होगा असर?
अमेरिका में ब्याज दरें ऊँची होने के कारण निवेशक सुरक्षित और उच्च-ग्रोथ बाजारों की तलाश में हैं। Budget 2026 में अगर भारत  FDI नियमों को और आसान करता है तथा इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर खर्च बढ़ाता है तो तो अमेरिकी पूंजी का बड़ा हिस्सा भारत की ओर शिफ्ट हो सकता है।  Wall Street भारत को अब “Next Growth Engine” के तौर पर देख रहा है।

ब्रिटेन (UK) के लिए क्यों अहम भारत का बजट?
ब्रेक्ज़िट के बाद ब्रिटेन नए ट्रेड पार्टनर्स की तलाश में है। Budget 2026 में  India-UK FTA के अलावा सर्विस सेक्टर और फाइनेंशियल कोऑपरेशन को गति मिलेगी।  लंदन की कंपनियों को भारत में बड़ा विस्तार मिल सकता है।  ब्रिटिश निवेशक खासकर IT, ग्रीन एनर्जी और स्टार्टअप सेक्टर पर नजर लगाए हुए हैं।

 

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