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स्वस्थ-जगत

भारत में फेमस हैं HPV वैक्सीन से जुड़े 3 मिथक

हर साल जनवरी का महीना 'गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जागरूकता माह'2026 (Cervical Cancer Awareness Month 2026) के रूप में मनाया जाता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर से जुड़ी मौतों में सबसे आगे है। यह कैंसर महिलाओं में होने वाले दूसरे सबसे आम कैंसर में से एक है, हालांकि राहत की बात यह है कि सही समय पर टीकाकरण और जांच के जरिए इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।

इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। चिंता की बात यह है कि इस कैंसर की HPV वैक्सीन को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं। जो इसके उपचार में कई बार देरी का कारण भी बनते हैं। ऐसे में सर्वाइकल कैंसर और इसकी HPV वैक्सीन से जुड़े 3 बड़े मिथकों की सच्चाई जानने के लिए हमने सीके बिरला अस्पताल की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति रहेजा के साथ बातचीत की।

मिथक 1: वैक्सीन सिर्फ सेक्सुअली एक्टिव महिलाओं के लिए है
सच्चाई- इस मिथक में सच्चाई बिल्कुल नहीं है। दरअसल, HPV वैक्सीन हर उस महिला पर अच्छे से काम करती हैं, जिसे वायरस से पहले लगाया गया हो। इस वैक्सीन को लगाने की सही उम्र 9 से 14 साल है। इस उम्र में इम्यून रिस्पॉन्स सबसे मजबूत होता है और वैक्सीन की भी सिर्फ 2 ही डोज लगती हैं। लेकिन यह वैक्सीन 26 साल तक और कुछ केस में उससे भी अधिक उम्र की महिलाओं को लाभ दे सकती है, यह उनकी व्यक्तिगत रिस्क फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

मिथक 2: वैक्सीन लेने से बच्चे जल्दी सेक्स करने लगेंगे
सच्चाई- इस मिथक का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह वैक्सीन प्रिवेंटिव हेल्थ माप है, जैसे बचपन या किशोरावस्था में करवाए गए अन्य टीकाकरण। जिसका मकसद बीमारी को होने से पहले रोकना है, न कि किसी व्यवहार को प्रभावित करना।

मिथक 3: शादी या बच्चे होने के बाद वैक्सीन लेने का कोई फायदा नहीं
सच्चाई- वैक्सीन मौजूदा HPV इंफेक्शन को ठीक नहीं करती, लेकिन यह उन स्ट्रेस से अभी भी सुरक्षा देती है जिनसे महिला अभी तक संक्रमित नहीं हुई है।

सुरक्षा को लेकर चिंता
डॉ. तृप्ति कहती हैं कि अक्सर पैरेंट्स वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। दुनिया भर में लाखों डोज लगाए जा चुके हैं, और HPV वैक्सीन को सुरक्षित, प्रभावी और अच्छे से सहन करने योग्य माना गया है। भारत में जहां सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग दर अभी भी कम है, वहां HPV वैक्सीन भविष्य में कैंसर के बोझ को कम करने का सबसे बड़ा मौका देती है। यह वैक्सीन स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है, बल्कि इसे पूरक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। आखिर में, HPV वैक्सीन डर से नहीं, दूरदर्शिता से जुड़ा कदम है। यह एक लंबे समय में स्वास्थ्य में निवेश है, जो कैंसर को शुरू होने से पहले रोक सकता है।

कौन ले सकता है HPV वैक्सीन?
-9–14 साल की उम्र के बच्चे
-15–26 साल की किशोर और युवा महिलाएं
-जिन महिलाओं में पहले HPV संक्रमण नहीं हुआ

सही जानकारी और समय पर वैक्सीनेशन से हम सर्वाइकल कैंसर के खतरे को भारत में कम करके महिलाओं को स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के लिए जागरूक कर सकते हैं।

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