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धर्म/ज्योतिष

कामयाबी की राह: भगवद् गीता के 5 श्लोक जो हर किसी को याद रखने चाहिए

कुछ लोगों के लिए सक्सेज पाना सपने के जैसा होता है। क्योंकि वो लाइफ में ज्यादातर कामों में फेलियर का सामना करते हैं और निराश रहते हैं। ऐसे निराश और हताश लोगों को अपनी आदतों में सुधार के साथ ही भगवद्गीता के इन श्लोकों को पढ़ने की जरूरत है। क्योंकि यहीं वो श्लोक हैं जो लाइफ में सक्सेज पाने और उसे बरकरार रखने में मदद करते हैं।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन

कर्म करो फल की चिंता ना करो। ये श्लोक उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो हर वक्त रिजल्ट की चिंता करते हैं। जिसकी वजह से ठीक तरीके से परफार्मेंस पर फोकस नहीं कर पाते। भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि हमेशा अपनी परफार्मेंस को अच्छा करने की चिंता करनी चाहिए। फल की चिंता में परफार्मेंस को बिल्कुल नहीं खराब होने देना चाहिए।

बदलाव प्रकृति का नियम है

गीता में कहा गया है कि इस दुनिया में कुछ भी परमानेंट नही है। जो आज है वो कल नहीं होगा। आप हमेशा सफल बने रहो ऐसा जरूरी नहीं। कई बार सफल होने के बाद आपको फेलियर का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए मन में किसी तरह के तनाव को लेना नहीं चाहिए बल्कि अपने काम पर फोकस करना चाहिए।

डर का त्याग जरूरी है

गीता में कहा गया है कि हमेशा निडर होकर अपने काम को करना चाहिए। किसी सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़कर कोशिश करनी चाहिए। फेलियर के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। किसी काम को शुरू करने के लिए पहली जरूर हिम्मत की भी होती है। फिर चाहे वो करियर में हो या फिर लाइफ में। फेल होने, नयी चीजों को सीखने और फिर आगे बढ़ने के लिए साहस जरूरी है। जिस दिन फेलियर का डर छोड़कर आगे बढ़ेंगे उसी दिन सक्सेज मिलेगी।

सक्सेज केवल पर्सनल नहीं होती

कई बार खुद के बारे में सोचने से ऊपर उठकर सोसायटी और फैमिली के बारे में सोचने की जरूरत होती है। जब आप दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो मन में गर्व के साथ संतुष्टि की फीलिंग आती है और ये भी एक सक्सेज ही है। जो आपको पावरफुल बनाती है।

मन को जीतने वाले के लिए मन ही मित्र है

जिस इंसान में मन को कंट्रोल नहीं किया उसके लिए मन किसी दुश्मन की तरह है। वहीं जो मन को अपने वश में कर लेता है, मन उसका फ्रेंड बन जाता है। जिसकी मदद से वो हर सफलता पा सकता है। खुद पर शंका करना, डरना और आलस जैसी बाधाओं को दूर भगा लेता है वहीं सक्सेज पाता है।

 

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