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उत्तर प्रदेश

टैरिफ संकट की मार: मुरादाबाद का निर्यात लगातार छह महीने से डाउन, 1.5 लाख मजदूरों पर संकट

मुरादाबाद

अमेरिका के टैरिफ की मार का असर निर्यातकों के साथ-साथ कारीगरों पर भी पड़ने लगा है। हस्तशिल्प उत्पादों के ऑर्डर घटने से अधिकांश निर्यातकों ने हफ्ते में दो दिन फैक्टरी बंद रखने का रास्ता पकड़ लिया है। साथ ही काम करने वालों का बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।

इसका ज्यादा असर उन कारीगरों और कामगारों पर पड़ रहा है, जो प्रभावित फैक्टरियों के लिए काम करते हैं। जानकार बताते हैं कि छह माह से निर्यात में लगातार गिरावट से करीब डेढ़ लाख कामगार बेरोजगार हो गए हैं।निर्यात क्षेत्र का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि पिछले साल हस्तशिल्प उत्पाद के कारोबार से करीब 5.50 लाख लोग जुड़े थे।

इनमें से अब केवल 3.85 लाख कामगारों के पास ही रोजगार बचा है। फैक्टरियों से जुड़े लोगों में से छह माह में करीब डेढ़ लाख कामगारों की सेवा खत्म हो चुकी है। निर्यातक अजय गुप्ता का कहना है कि जिले में छह हजार से अधिक फैक्टरियों में हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

छह महीने के भीतर 25 से 30 प्रतिशत निर्यात घट गया है। पिछले छह महीने में पीतलनगरी के कुल कारीगारों में से 30 प्रतिशत की सेवा जा चुकी है। अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आने वाले छह महीने में हजारों कामगारों की सेवाए और प्रभावित होंगी। फैक्टरी संचालकों को नुकसान के कारण एेसे कदम उठाने पड़े हैं।

द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने बताया कि अमेरिकी काम हाथ से निकलने के कारण तमाम फैक्टरियों में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं। नए ऑर्डर कम मिलने का असर फैक्टरियों में काम करने वालों पर पड़ रहा है। जिले में करीब 100 फैक्टरियां ऐसी हैं, जहां पर हफ्ते में दो दिन काम बंद रहता है।

उनका कहना है कि अगर अमेरिका की 50 प्रतिशत टैरिफ की मार जारी रही तो आने वाले एक साल में हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात खत्म होने की कगार पर पहुंचने का खतरा है। वह अमेरिकी टैरिफ के साथ धातुओं की महंगाई को भी काम पर असर का बड़ा कारण मान रहे हैं।

40 प्रतिशत ऑर्डर मिलते हैं अमेरिका से
जिला उद्योग केंद्र के मुताबिक पीतलनगरी से हर साल 10437 करोड़ रुपये के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात किया जाता है। बीते साल यह निर्यात 30 प्रतिशत कम हुआ है। करीब सात हजार करोड़ रुपये के ही उत्पादों का निर्यात हो पाया। एमएचईए के प्रेसिडेंट नावेद उर रहमान ने बताया कि कुल निर्यात के 40 प्रतिशत हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात के ऑर्डर अमेरिका से मिलतें हैं।

अमेरिकी खरीदारों ने तीन महीने से ऑर्डर होल्ड कर दिए हैं। रॉ-मैटेरियल की कीमतें लगातार बढ़ने से 2.75 प्रतिशत सबवेंशन स्कीम का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। विदेशों में स्टोर खोलने से निर्यात नहीं बढ़ेगा, क्योंकि बड़ी फैक्टरियों को बड़े ऑर्डर की जरूरत है न की 10 से 15 पीस के ऑर्डर की। अमेरिका से ही सबसे ज्यादा ऑर्डर मिलते थे। पांच-छह महीने इसी तरह की स्थिति रही तो लाखों का नुकसान उठाना पड़ेगा।  -अजय गुप्ता, निर्यातक

फैक्टरियों में ठेके पर काम करने वाले कारीगरों को सबसे ज्यादा नुकसान है। ऑर्डर कम मिलने से उन्हें समय से काम नहीं मिल पा रहा है। कई ठेकेदार तीन महीने से खाली बैठे हुए है। निर्यातकों के पास ऑर्डर नहीं है कि उन्हें काम दे सकें। बड़ी फैक्टरियां चलाने में हर महीने औसतन 50 लाख रुपये तक खर्च आता है। इन फैक्टरियों को करोड़ों का ऑर्डर चाहिए। यह तभी संभव होगा जब विदेशों में शांति और ज्यादा महंगाई न हो। – सतपाल, सचिव, द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

अमेरिका समेत अन्य देशों में ऑर्डर को लेकर खरीदारों से बातचीत चल रही है लेकिन कोई फायदा नहीं है। रॉ-मैटेरियल के बढ़ते दाम और अमेरिका टैरिफ की स्थिति से ऑर्डर कम मिल रहे हैं। इससे फैक्टरी चलाना मुश्किल हो रहा है। छह महीने में हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में समस्याएं और बढ़ जाएंगी।  – विभोर गुप्ता, संचालक, डिजाइनको

अमेरिकी टैरिफ की वजह से पुराने आर्डर होल्ड पर हैं। पुराने माल की सप्लाई मुश्किल हो गई है। अमेरिका के लिए अब 30 प्रतिशत निर्यात का औसत है। अमेरिकी खरीदारों का कहना है कि उनके यहां हस्तशिल्प उत्पादों का पुराना स्टॉक नहीं बिका है। इसकी वजह से वह ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। पुराना स्टॉक क्लियर होने पर ही ऑर्डर मिल पाएंगे। – मोहम्मद अख्तर शम्सी, चेयरमैन, पैरामाउंट होम कलेक्शंस

 

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