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बस में मॉडिफिकेशन करने वालों पर परिवहन विभाग करेगा सख्त कार्रवाई

रांची.

जिला परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पर स्लीपर बसों की विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर सख्ती दिखाई गई और कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

जांच के क्रम में कुल 21 बसों की जांच की गई। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआइआरटी) द्वारा स्लीपर बसों के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित बस संचालकों को नोटिस जारी किया गया। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि चेसिस में एक्सटेंशन लगाकर बनाई गई बस बॉडी को तत्काल संचालन से हटाया जाएगा। सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण अब केवल किसी अप्रूव्ड टेस्ट एजेंसी की मंजूरी के साथ फार्म-22/22ए के आधार पर ही किया जाएगा। हर बस के पंजीकरण के समय लेआउट ड्राइंग अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी, जिसमें बस के आयाम, दरवाजों की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच का स्पष्ट विवरण हो। इसके अलावा बस बॉडी निर्माता की मान्यता की वैधता की भी जांच अनिवार्य की जाएगी।

उप परिवहन आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल) रांची हरविंश पंडित, मोटरयान निरीक्षक रांची विमल किशोर सिंह तथा जिला परिवहन पदाधिकारी रांची अखिलेश कुमार ने संयुक्त रूप से सभी स्लीपर बसों की गहन जांच की। अधिकारियों ने बताया कि स्लीपर कोचों में चालक के केबिन में लगाए गए पार्टीशन दरवाजे को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ बसों से मौके पर ही पार्टीशन हटाने को कहा गया। इसके अलावा, सभी स्लीपर कोचों के बर्थ में लगे स्लाइडर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

अग्नि सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्लीपर बसों में एफडीएसएस (फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम) लगाने के लिए बस आपरेटरों को एक माह का समय दिया गया है। साथ ही सभी बसों में न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के फायर एक्सटिंग्विशर (ग्रीन जोन) की उपलब्धता और कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है। खादगढ़ा बस स्टैंड पर उपस्थित वाहन मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सीआईआरटी द्वारा जारी सभी सुझावों और निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने पर सहमति जताई और तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकार की सड़क सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है, जिसमें यात्रियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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