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देश

बिहार पुलिस 50 एडवांस ड्रोन से यातायात और भीड़ करेगी कण्ट्रोल

पटना.

बिहार पुलिस अब कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य में पहली बार बिहार पुलिस की एक अलग ड्रोन यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और यातायात कण्ट्रोल करेगी।

एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन यूनिट के गठन से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तेज और तकनीक आधारित बनेगी।

ड्रोन यूनिट का गठन, 50 आधुनिक ड्रोन खरीदेंगे
एडीजी सुधांशु कुमार के अनुसार, इस यूनिट के लिए कुल 50 आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों को दिए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन विशेष कार्यों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को मिलेंगे। इन ड्रोन की खरीद केंद्र सरकार की ASUMP (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड ड्यूटीज फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस) योजना के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह ड्रोन यूनिट मार्च तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी।

निगरानी में होगा ड्रोन का प्रमुख उपयोग
ड्रोन तकनीक का एक प्रमुख उपयोग यातायात निगरानी में होगा। एडीजी ने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत लेन में ड्राइविंग करने, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने और जाम लगाने जैसी स्थितियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्रोन यूनिट बड़े आयोजनों, त्योहारों, वीआईपी मूवमेंट और संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऊंचाई से पूरे क्षेत्र की लाइव निगरानी संभव होगी, जिससे स्थिति का तुरंत आकलन कर पुलिस बल की प्रभावी तैनाती की जा सकेगी।

अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी
STF को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दियारा क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सक्रिय अपराधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि, इन इलाकों में पुलिस की भौतिक पहुंच सीमित रहती है, लेकिन ड्रोन के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।

ड्रोन यूनिट के गठन से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इससे अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

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