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स्वस्थ-जगत

शंख भस्म: हड्डियों और जोड़ों के लिए अमृत, कैल्शियम से भरपूर लाभकारी तत्व

 आयुर्वेद में उपचार के लिए सदियों से दुर्लभ जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता आया है। जड़ी-बूटियों के गुण बड़े से बड़े रोग से मुक्ति दिलाने की शक्ति रखते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि आयुर्वेद में भस्म के जरिए भी रोगों को दूर करने का काम पहले से होता आया है। हम बात कर रहे हैं शंख भस्म की, जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म के नाम से जाना जाता है। शंख भस्म एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं के उपचार में किया जाता है। इसमें अम्लरोधी गुण होते हैं जो सीने में जलन और दर्द जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करते हैं। रसशास्त्र में शंख को शुद्ध वर्ग के अंतर्गत एक खनिज के रूप में वर्णित किया गया है। शंख भस्म आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा दैनिक अभ्यास में उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण भस्मों में से एक है।

शंख भस्म का उपयोग पेट से जुड़े विकारों से लेकर हड्डियों और जोड़ों के विकारों को ठीक करने में किया जाता है, लेकिन ध्यान रखने वाली बात ये है कि बिना चिकित्सक के शंख भस्म का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इसे सीधा खाया नहीं जाता है, बल्कि किसी न किसी चीज में मिक्स कर इसका सेवन किया जाता है। ये स्वाद में तीखी होती है और रोग के अनुसार इसके सेवन की मात्रा तय की जाती है।
अगर पेट की पाचन अग्नि कमजोर हो गई है, पेट में दर्द रहता है, गैस बनने की वजह से उल्टी की परेशानी या सिर में दर्द होता है, तो शंख भस्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। शंख भस्म पाचन अग्नि को रीसेट करती है, जिससे खाना अच्छे से पचता है और पाचन की प्रक्रिया में सुधार आता है।

शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट होता है। यह हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने, ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती को बनाए रखने में मदद करता है। अगर शरीर में कैल्शियम की कमी है, तब भी शंख भस्म का सेवन किया जा सकता है, लेकिन गर्भवती महिलाएं सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
शंख भस्म शरीर में वात और कफ दोषों को संतुलित करने का काम भी करती है। अगर ये दोनों ही दोष शरीर में असंतुलित हैं तो कई बीमारियों का जन्म होता है। इससे पेट से लेकर स्किन से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं। इसके अलावा, चेहरे के मुहांसों और दाग धब्बों से छुटकारा पाने के लिए भी शंख भस्म का लेपन और सेवन कर सकते हैं।

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