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टेक्नोलॉजी

Siri और Apple Intelligence को बेहतर बनाने के लिए Apple-Google की साझेदारी, कॉम्पिटिटर्स बने पार्टनर

मुंबई 

AI की रेस में अब Apple ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी उम्मीद शायद बहुत कम लोगों को थी. iPhone बनाने वाली कंपनी ने ऑफिशियली इस बात को कन्फर्म कर दिया है, कि आने वाले समय में Siri और Apple Intelligence को ताकत देने के लिए वह Google के Gemini AI मॉडल्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करेगी. यह नया Siri इस साल 2026 के अंत तक यूजर्स के सामने आ सकता है. ऐसे में यह साझेदारी Apple के सॉफ्टवेयर इतिहास की सबसे अहम डील्स में से एक मानी जा रही है. क्योंकि, पहली बार कंपनी ने खुले तौर पर माना है कि जेनरेटिव AI की रेस में उसकी अपनी टेक्नोलॉजी फिलहाल पीछे रह गई है. ऐसे में Apple ने अपने पुराने कॉम्पिटिटर Google के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया.
Apple और Google के बीच क्या तय हुआ है?

Apple और Google के बीच हुई यह मल्टी-ईयर पार्टनरशिप, एप्पल के अगले जेनरेशन के Apple Foundation Models को Google के Gemini मॉडल्स पर बेस्ड बनाएगी. इन्हीं,मॉडल्स के सहारे Apple Intelligence के नये फीचर्स तैयार होंगे, जिनमें इस साल के अंत तक आने वाला ज्यादा पर्सनलाइज्ड Siri भी शामिल है.

हालांकि, Apple ने साफ किया है कि यूजर्स को जो फीचर्स मिलेंगे, वे पूरी तरह Apple Intelligence के नाम से ही आएंगे. Google सीधे तौर पर Siri नहीं बना रहा और न ही यह डील किसी कंज्यूमर-फेसिंग प्रोडक्ट के लिए है. Gemini सिर्फ एक मजबूत टेक्निकल लेयर की तरह काम करेगा, जो Apple की AI टेक्नोलॉजी के नीचे रहेगा.

सबसे अहम बात यह है कि यह समझौता एक्सक्लूसिव नहीं है. Apple ने भविष्य में अन्य AI कंपनियों के साथ काम करने का रास्ता खुला रखा है और अपनी AI मॉडल डेवलपमेंट भी जारी रखेगा. फिलहाल Apple का OpenAI के साथ भी समझौता है, जिसके तहत ChatGPT कई Apple Intelligence फीचर्स को पावर करता है.
Apple ने क्यों चुना Google का Gemini?

Apple और Google की ओर से जारी बयान में कहा गया है, कि कई ऑप्शंस को देखने के बाद Gemini को चुना गया है. Apple के मुताबिक, Google की AI टेक्नोलॉजी उसके Apple Foundation Models के लिए सबसे मजबूत आधार साबित हुई है. इस मल्टी-ईयर डील के तहत Gemini और Google का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ Siri ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में Apple Intelligence के दूसरे फीचर्स को भी पावर देगा.
प्राइवेसी को लेकर Apple की सबसे बड़ी चिंता

वहीं, एप्पल-गूगल की इस डील की सबसे नाजुक पहलू है यूजर्स की प्राइवेसी. Apple के लिए यूजर्स प्राइवेसी ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है. ऐसे में Apple ने यह साफ किया है कि यूजर डेटा की प्रोसेसिंग या तो डिवाइस पर होगी या फिर उसकी Private Cloud Compute सर्विस पर. यानी प्राइवेसी को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. Google सिर्फ AI मॉडल्स और टेक्निकल क्षमता दे रहा है, यूजर डेटा को न तो विज्ञापन (AD) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और न ही AI ट्रेनिंग के लिए.
बार-बार टलता रहा Siri का AI अपग्रेड

एप्पल-गूगल की यह साझेदारी Apple की Plan-B मानी जा रही है. कंपनी ने पहली बार WWDC 2024 में AI-पावर्ड Siri की झलक दिखाई थी. उस वक्त दावा किया गया था, कि नया Siri यूजर के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को समझ सकेगा और बातचीत के जरिए ऐप्स को कंट्रोल करने जैसी खूबियां देगा. लेकिन हकीकत में चीजें इतनी आसान नहीं रहीं. मार्च 2025 में Apple को खुद स्वीकार करना पड़ा कि Siri का यह बड़ा अपग्रेड तय समय पर तैयार नहीं हो पाया है. इसके बाद लॉन्च को 2026 तक टाल दिया गया, जिससे कंपनी की AI रणनीति पर सवाल उठने लगे.
अब क्या बदलेगा?

Google के Gemini के जुड़ने से Apple को वह तकनीकी आधार मिल गई है, जिसकी उसे कमी महसूस हो रही थी. अगर सब कुछ प्लानिंग के मुताबिक रहा, तो आने वाला Siri पहले से कहीं ज्यादा समझदार, तेज और नेचुरल बातचीत करने वाला होगा. हालांकि, अब असली परीक्षा यूजर्स के एक्सपीरियंस में होगी, कि क्या Apple, Google की AI ताकत को अपने डिजाइन और प्राइवेसी-फर्स्ट अप्रोच के साथ सही तरह से जोड़ पाएगा या नहीं. अगर यह तालमेल सफल रहा, तो Siri को आखिरकार वह अपग्रेड मिल सकता है, जिसका इंतजार सालों से आईफोन यूजर्स कर रहे हैं.

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