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टेक्नोलॉजी

Vivoo स्मार्ट टॉयलेट का नया फीचर: अब हर फ्लश के बाद मिलेगा हेल्थ चेकअप रिपोर्ट

नई दिल्ली
अब तक आपने स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड को अपनी सेहत पर नजर रखते देखा था. लेकिन टेक्नोलॉजी अब एक कदम और आगे बढ़ चुकी है. अब आपका टॉयलेट भी आपकी हेल्थ मॉनिटर कर सकता है.

CES 2026 में पेश हुई नई स्मार्ट टॉयलेट टेक्नोलॉजी ने दिखा दिया है कि आने वाले समय में बाथरूम सिर्फ साफ होने की जगह नहीं, बल्कि डेली हेल्थ चेक-अप पॉइंट बन सकता है.

इस पूरे ट्रेंड में सबसे ज्यादा चर्चा में रही अमेरिकी हेल्थ-टेक कंपनी Vivoo. आप इसे स्मार्टफोन मेकर Vivo ना समझें, क्योंकि Vivoo एक अलग अमेरिकी कंपनी है.

बहरहाल, कंपनी यानी Vivoo ने CES में Vivoo Smart Toilet Sensor पेश किया है. यह कोई पूरा नया टॉयलेट नहीं, बल्कि एक छोटा डिवाइस है जिसे किसी भी सामान्य टॉयलेट के रिम पर क्लिप किया जा सकता है.

हर बार जब यूज़र टॉयलेट इस्तेमाल करता है, यह सेंसर पेशाब के सैंपल को ऑटोमैटिकली स्कैन करता है. इसके अंदर लगे ऑप्टिकल सेंसर यूरिन की डेंसिटी और कलर को पढ़ते हैं और इससे पता चलता है कि शरीर में पानी की मात्रा सही है या नहीं.

यह सेंसर ब्लूटूथ से मोबाइल ऐप से जुड़ता है. हर फ्लश के बाद ऐप पर हाईड्रेशन रिपोर्ट आ जाती है. दिन, हफ्ते और महीने का ट्रेंड भी दिखता है कि कब शरीर में पानी की कमी हुई और कब हाईड्रेशन सही रहा.

कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस खासतौर पर फिटनेस फॉलो करने वाले लोगों, बुजुर्गों और उन यूज़र्स के लिए बनाया गया है जिन्हें किडनी या यूरिन से जुड़ी हेल्थ पर लगातार नजर रखनी होती है.

कीमत करीब 100 अमेरिकी डॉलर के आसपास रखी गई है, यानी भारतीय बाजार के हिसाब से 8-9 हजार रुपये.  बेसिक ऐप फ्री है, जबकि एडवांस्ड ट्रेंड एनालिसिस के लिए बाद में सब्सक्रिप्शन मॉडल भी रखा गया है.

CES में कुछ दूसरी कंपनियों ने इससे भी आगे की टेक्नोलॉजी दिखाई. ऐसे फुल स्मार्ट टॉयलेट सिस्टम, जो सिर्फ हाईड्रेशन ही नहीं बल्कि यूरीन और स्टूल से हेल्थ पैटर्न भी पहचान सकते हैं. इससे शुरुआती स्तर पर किडनी प्रॉब्लम, इंफेक्शन या डाइजेशन से जुड़ी गड़बड़ी के संकेत मिल सकते हैं. आसान भाषा में कहें तो बाथरूम से निकलने वाला डेटा अब शरीर के अंदर की कहानी बता सकता है.

अब एक नया सवाल भी उठ रहा है. जब स्मार्टवॉच, स्मार्ट स्पीकर और हेल्थ ऐप पहले ही हमारा पर्सनल डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, तो स्मार्ट टॉयलेट से निकलने वाला हेल्थ डेटा भी प्राइवेसी का मुद्दा बनेगा.

कंपनियां दावा कर रही हैं कि डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा और यूज़र की अनुमति के बिना शेयर नहीं होगा. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि हेल्थ डेटा सबसे संवेदनशील जानकारी में से एक है, इसलिए इस पर भरोसा और नियम दोनों जरूरी होंगे.

फिलहाल इतना तय है कि टेक्नोलॉजी अब शरीर के सबसे निजी हिस्सों तक पहुंच चुकी है. आने वाले समय में डॉक्टर के पास जाने से पहले पहला हेल्थ चेक-अप शायद आपके अपने बाथरूम में ही हो जाएगा. और यह बदलाव हेल्थकेयर की दुनिया में उतना ही बड़ा हो सकता है, जितना कभी स्मार्टवॉच का आना था ये देखना दिलचस्प होगा. 

 

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