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देश

राफेल सौदे में नई रफ्तार, 114 विमानों की डील के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति दिल्ली में होंगे मौजूद

नई दिल्ली

भारत का MRFA प्रोग्राम के तहत फाइटर जेट खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे संकेत मिले हैं, जिनके दम पर कहा जा रहा है कि 114 राफेल फाइटर जेट की डील जल्द फाइनल हो सकती है. दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील से देश की एयरोस्पेस की तस्वीर बदल जाएगी. इस डील के तहत भारत राफेल-F4 और राफेल-F5 खरीदेगा, जिसे सुपर राफेल डील भी कहा जाता है. इस डिफेंस डील के पीछे सबसे बड़ा डेवलपमेंट फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भारत विजिट है. 

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने प्रस्तावित भारत दौरे की खुद पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि डिप्लोमैटिक कोर संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट-2026 में वे शामिल होंगे. यह समिट 19-20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित किया जाएगा. इस समिट की घोषणा पीएम मोदी ने फ्रांस में की थी.  

इमैनुएल आ रहे दिल्ली
मैक्रों के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम व्यापारिक और रक्षा समझौते हो सकते हैं. इस दौरान सबसे अहम समझौता रक्षा समझौता होगा. जो भारत और फ्रांस के बीच G2G होगा. यानी सरकार से सरकार के बीच डील होगी. यह दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील बताई जा रही है, जो भारत और फ्रांस के बीच होने जा रही है. इस डील के तहत भारत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदेगा. खास बात है कि यह डील भारत और फ्रांस की तरफ से फाइनल मानी जा रही है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसकी वजह भी भारत है. फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने तो सार्वजिक ने तौर पर डील की घोषणा कर दी थी. 

भारत की तरफ से नहीं मिला AON
बता दें कि पिछले दिनों फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर डील से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए थे. जिस पर भारत ने आपत्ति जताई तो फ्रांस ने दस्तावेजों को हटा लिया. वहीं भारत की बात करें तो यह डील अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी है. डील संबंधित सभी शर्तों पर बातचीत हो चुकी है. इस प्रोजेक्ट में भारत की तरफ से MRFA और सरकार दोनों शामिल हैं. अभी तक MRFA प्रोजेक्ट में मुख्य भूमिका निभा रहा था. अब सिर्फ  Acceptance of Necessity (AoN) बाकी है. 

G2G डील होगी फाइनल
IAF से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार सीधे डसॉल्ट एविएशन से बातचीत करना चाह रही है.  इससे लंबे और जटिल MRFA टेंडर प्रोसेस को दरकिनार किया जा सकता है, जिसमें आमतौर पर 4–5 साल लग जाते हैं. वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी चाहते हैं कि यह सौदा पहले की तरह सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल पर हो, ताकि फाइटर स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा किया जा सके. इस समय IAF की स्क्वाड्रन संख्या तय मानक से काफी कम है. अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान इस डील को राजनीतिक स्तर पर बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है.

नागपुर बनेगा राफेल सिटी
सूत्रों का कहना है कि 114 राफेल जेट्स का ऑर्डर लगभग तय माना जा रहा है और इनका निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए Dassault की सब्सिडियरी भारत में प्रोडक्शन लाइन लगाएगी. यह फैक्ट्री सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में राफेल के एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी काम कर सकती है. 

राफेल का निर्माण नागपुर स्थित Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL) प्लांट में किया जा सकता है. हालांकि, इस जॉइंट वेंचर की संरचना में बड़ा बदलाव संभव है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Dassault कंपनी अनिल अंबानी की Reliance Defence की हिस्सेदारी खरीदकर प्लांट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है, जिसके लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होगी. मंजूरी मिलते ही प्लांट को फुल-स्केल फाइटर जेट प्रोडक्शन के लिए अपग्रेड किया जाएगा.

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